आईएएनएस से बात करते हुए यामी ने कहा, ‘जब मैं स्कूल में थिएटर सीख रही थी, तब वहां एक नया टीचर आया था। थिएटर बस शुरू हो रहा था और हर छात्र को अपनी लाइन अलग अंदाज में बोलनी थी। मुझे याद है कि मेरा एक डायलॉग था, ‘चुप रहो, छोटे शैतान, वरना मैं तुम्हारा गला काट दूंगी’, ये लाइन मैंने इतनी अजीब तरीके से कही कि सभी लोग हंस-हंसकर लोटपोट हो गए।’
टीचर ने मजाकिया अंदाज में कहा
उन्होंने बताया, ‘इसके बाद टीचर ने मजाकिया अंदाज में मुझसे कहा कि तुम तो किसी गली के आदमी की तरह बोल रही हो, मैंने कहा- मुझे नहीं पता मैं कैसे करूं, लेकिन एक बात अच्छी है कि कम से कम आपको मेरी लाइनें तो याद हैं।’
कलाकार और निर्देशक के बीच की क्रिएटिव पार्टनरशिप
यामी ने एक्टिंग और निर्देशक के बीच के संबंध पर भी बात की। उन्होंने कहा, ‘निर्देशक कहानी की दिशा तय करता है और एक्टर उनके विजन को स्क्रीन पर दिखाता है। एक ही किरदार को एक एक्टर कई अलग-अलग तरीकों से निभा सकता है, और इनमें से कोई तरीका गलत या सही नहीं होता। लेकिन स्क्रीन पर जो दिखता है वह हमेशा निर्देशक के विजन का हिस्सा होता है। यह कलाकार और निर्देशक के बीच की क्रिएटिव पार्टनरशिप को दिखाता है।’
अपने अनुभव और प्रतिभा का इस्तेमाल
उन्होंने कहा, ‘एक्टिंग केवल डायलॉग बोलने तक सीमित नहीं है। यह किरदार की भावनाओं, मानसिकता और कहानी की दिशा को समझने का तरीका है। जब निर्देशक सही दिशा दिखाते हैं, तो एक्टर को अपने अनुभव और प्रतिभा का इस्तेमाल कर कहानी को और प्रभावशाली बनाना होता है। निर्देशक और एक्टर का तालमेल ही किसी फिल्म को सफल बनाता है।’












