फाइनल डील से पहले AoN का फैसला क्यों?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने इस सप्ताह अपने सबसे एडवांस फ्रांससी राफेल फाइटर जेट के लिए 36 मीटियोर एयर-टू-एयर मिसाइलों की खरीद को अप्रूव किया है। फॉलो-ऑन डील के फाइनल क्लोजर से पहले AoN लेने का फैसला, प्रोसीजरल अप्रूवल को ‘फ्रंट-लोड’ करने की स्ट्रैटेजी दिखाता है। इससे कमर्शियल बातचीत फाइनल होने के बाद डिलीवरी टाइमलाइन कम हो जाएगी। रक्षा मंत्रालय के इस कदम से इंडियन एयर फोर्स के फ्रंटलाइन राफेल फाइटर जेट फ्लीट के लिए मीटियोर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से हवाई युद्ध क्षमताओं को अधिक मजबूत होगी।
मीटियोर मिसाइल की खासियत
यूरोपीय कंसोर्टियम MBDA की तरफ से बनाई जाने वाली मीटियोर मिसाइल को अपने अनोखे प्रोपल्शन सिस्टम की वजह से आधुनिक हवाई युद्ध में गेम-चेंजर की पहचान रखती है। यह पारंपरिक हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के विपरीत एक सॉलिड-फ्यूल वेरिएबल फ्लो डक्टेड रॉकेट (रैमजेट) से चलती है।
यह टेक्नोलॉजी मिसाइल को क्रूज के दौरान अपने इंजन को थ्रॉटल करने और मैक 4 से अधिक स्पीड तक पहुंचने की अनुमति देती है। इससे, मिसाइल के टारगेट तक पूरे रास्ते में हाई एनर्जी लेवल बना रहता है। इस यूरोपीय लंबी दूरी की मिसाइल की रेंज 200 किलोमीटर तक है। ऐसे में IAF पायलट दुश्मन के डिफेंस के खतरनाक दायरे से बाहर रहते हुए विवादित एयरस्पेस पर हावी रह सकेंगे।














