पाकिस्तान के बाद इक्वाडोर का नंबर है जिस पर आईएमएफ का 7.2 अरब डॉलर का कर्ज है। मिस्र ने आईएमएफ से 6.2 अरब डॉलर का कर्ज ले रखा है। आइवरी कोस्ट पर आईएमएफ का 3.62 अरब डॉलर का कर्ज है जबकि केन्या 2.94 अरब डॉलर का कर्जदार है। बांग्लादेश ने भी आईएमएफ से 2.88 अरब डॉलर का कर्ज ले रखा है। अफ्रीकी देश घाना (2.85 अरब डॉलर) और अंगोला (2.52 अरब डॉलर) भी आईएमएफ के टॉप 10 कर्जदारों में शामिल हैं।
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कौन-कौन है टॉप 10 में
डेमोक्रेटिक रिपब्लिकन ऑफ कांगो ने आईएमएफ से 2.22 अरब डॉलर का कर्ज ले रखा है और यह सबसे बड़े कर्जदारों की लिस्ट में 11वें नंबर पर हैं। कोस्टारिका पर आईएमएफ का 1.79 अरब डॉलर का कर्ज चढ़ा है। इसी तरह श्रीलंका ने भी आईएमएफ से 1.77 अरब डॉलर का कर्ज ले रखा है। इस छोटे से देश में कुछ समय पहले आर्थिक हालात बहुत खराब हो गए थे। जॉर्डन पर आईएमएफ का 1.66 अरब डॉलर का कर्ज है जबकि इथियोपिया ने 1.57 अरब डॉलर का कर्ज ले रखा है।
IMF के सदस्य देशों की संख्या 191 है। इसकी स्थापना 1930 की महामंदी के बाद साल 1944 में 44 देशों ने की थी। आईएमएफ ने अपने सदस्य देशों को 1 ट्रिलियन डॉलर का लोन दे चुका है। आईएमएफ सदस्य देशों को वित्तीय मदद देता है और जिम्मेदार खर्च सुनिश्चित करने के लिए सरकारों पर कई तरह की शर्तें भी लगाता है। आईएमएफ कई तरह के लोन देता है। ये देशों की अलग-अलग जरूरतों और परिस्थितियों के हिसाब से दिए जाते हैं। आईएमएफ कम आय वाले देशों को भी शून्य ब्याज दर पर लोन देता है।
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कैसे मिलता है लोन
पाकिस्तान कई बार आईएमएफ से लोन ले चुका है जबकि भारत ने 1993 से अब तक कभी भी इस संस्था से लोन नहीं लिया है। आईएमएफ से लोन लेने के लिए सबसे पहले सदस्य देश इसके लिए आवेदन करता है। इसके बाद देश की सरकार और आईएमएफ कर्मचारी आर्थिक और वित्तीय स्थिति और फंडिंग आवश्यकताओं पर चर्चा करते हैं। लोन देने के लिए आईएमएफ कई तरह की शर्तें लगाता है। अगर संबंधित देश इन शर्तों को मान लेता है तो फिर लोन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है।











