रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यमन में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच दिसंबर से ही मतभेद चल रहा है। दोनों देश यमन में विरोधी पक्षों का समर्थन करते हैं और उनके समर्थन में सैन्य इस्तेमाल से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। ताजा ऑपरेशन को लेकर भी दोनों ओर से अलग-अलग दावे किए गए हैं।
क्या हैं दावे
यूएई समर्थित ट्रांजिशनल काउंसिल के सीनियर अधिकारी अम्र अल बिध ने रॉयटर्स को बताया कि सऊदी अरब सैन्य हमले कर रहा है। अम्र अल का कहना है कि सऊदी अरब ने जानबूझकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने के लिए शांतिपूर्ण ऑपरेशन की घोषणा की। उन्होंने इसके कुछ ही मिनटों बाद सात हवाई हमले किए।
यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने शुक्रवार को अपने बयान में कहा है कि उसने हद्रामौत के गवर्नर सलेम अहमद सईद अल खुन्बाशी को पूर्वी प्रांत में होमलैंड शील्ड बलों की कमान सौंपी है। उन्हें मिलिट्री, सुरक्षा और प्रशासनिक अधिकार दिए हैं। इसे उसने सुरक्षा और व्यवस्था बहाल करने का कदम बताया है।
STC ने क्या कहा
दूसरी ओर STC ( सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल ) के प्रवक्ता मोहम्मद अल-नकीब ने शुक्रवार को कहा कि पूरे क्षेत्र में उनकी सेनाएं अलर्ट और जोरदार जवाब देने के लिए तैयार हैं। STC के बिध ने रॉयटर्स को बताया कि तीन हवाई हमलों में अल खशा मिलिट्री कैंप को निशाना बनाया गया, जो प्रांत के सबसे बड़े कैंपों में से है। यूएई समर्थित समूह STC दक्षिणी यमन को एक अलग देश बनाने की मांग करता है।
तीन यमनी सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि सऊदी समर्थित सरकार के बख्तरबंद वाहन हद्रामौत में खशा कैंप की ओर बढ़ रहे हैं। इन कैंपो में हजारों सैनिकों को रखने की क्षमता है और इसे दिसंबर में STC ने अपने कब्जे में ले लिया था। इसको सऊदी समर्थित सरकार वापस लेने की कोशिश कर रही है। इसमें सेना का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल दोनों पक्षों को एक बार फिर से आमने-सामने ला सकता है।













