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  • पैंगोंग झील के पास नई इमारतें बना रहा चीन, सैटेलाइट तस्वीर ने बढ़ाई भारत की टेंशन

    बीजिंग: चीन पैंगोंग झील के पास चीन नई इमारतें बना रहा है। ये इमारतें भारत-चीन के बीच बने मिलिट्री बफर जोन के करीब हैं। हालांकि, यह गतिविधि चीन के कब्जे वाले इलाके में हो रही हैं। इसके बावजूद इसने भारत की चिंता को बढ़ा दिया है। चीन लगातार इस इलाके में अपनी सैन्य उपस्थिति को


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    By Azad Hind Desk जनवरी 4, 2026
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    बीजिंग: चीन पैंगोंग झील के पास चीन नई इमारतें बना रहा है। ये इमारतें भारत-चीन के बीच बने मिलिट्री बफर जोन के करीब हैं। हालांकि, यह गतिविधि चीन के कब्जे वाले इलाके में हो रही हैं। इसके बावजूद इसने भारत की चिंता को बढ़ा दिया है। चीन लगातार इस इलाके में अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत कर रहा है। इसका प्रमुख कारण पैंगोंग त्सो झील का महत्व और इसके आसपास का कठोर मौसम है। चीनी सैनिक ऐसे भीषण हालातों में रहने के अनुकूल नहीं है, जिसके लिए चीन अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है।

    पैंगोंग झील के पास इमारतें बना रहा चीन

    ओपन सोर्स इंटेलिजेंस @detresfa_ ने एक्स पर एक सैटेलाइट तस्वीर शेयर कर लिखा है, “चीन पैंगोंग त्सो में भारत के साथ मिलिट्री बफर जोन के पास नई इमारतें बना रहा है, हालांकि यह गतिविधि चीन के कब्जे वाले इलाके में है, लेकिन यह 2020 के सीमा विवाद के बाद बीजिंग की फिजिकल मौजूदगी को मजबूत करता है और इस क्षेत्र में उसके क्षेत्रीय दावों को धीरे-धीरे फिर से तय करता है।”

    चीन ने पैंगोंग झील पर पुल भी बनाया

    चीन ने इससे पहले पैंगोंग झील पर एक पुल का भी निर्माण किया था। यह पुल झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों को जोड़ता है, जिससे चीनी सेना को सैनिकों और टैंकों को तेजी से लाने-ले जाने और तैनाती करने में मदद मिल सकती है। चीन 2020 के गतिरोध के बाद भारतीय सेना की कब्जाई जगहों के पास अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा रहा है। माना जा रहा है कि यह पुल सैन्य आवाजाही के समय को काफी कम कर सकता है।

    पैंगोंग झील विवाद

    भारत और चीन के बीच पैंगोंग झील को लेकर पुराना विवाद है। यह झील भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थित है। पैंगोंग झील के फिंगर 4 से फिंगर 8 तक के क्षेत्र पर भारत दावा करता है, लेकिन 2020 में चीन ने इस क्षेत्र पर कब्जे की कोशिश की। इसके बाद दोनों देशों की सेनाएं पैंगोंग झील के दोनों ओर आमने-सामने आ गईं थीं। वर्षों तक चले तनाव और तैनाती के बाद दोनों देशों ने अपनी सेनाओं को पीछे हटाया था।

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