देश का कर्ज कम करने के लिए ट्रंप ने भारत समेत दुनिया भर के देशों पर जमकर टैरिफ लगाया है। साथ ही उन्होंने कई कंपनियों को भी अमेरिका में निवेश के लिए मजबूर किया। इनमें ऐपल, एनवीडिया और माइक्रोन शामिल हैं। इतना ही नहीं उन्होंने चिप बनाने वाली कंपनियों एनवीडिया और एएमडी को भी चीन को एक्सपोर्ट करने की अनुमति देने के लिए कमाई का 15% हिस्सा मांग लिया। साथ ही देश में कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए ड्रिल बेबी ड्रिल जैसे नारे उछाले।
25 साल बाद फिर फूटने वाला है बुलबुला! अमेरिका की इकॉनमी से कहीं ज्यादा बड़ा हो चुका है स्टॉक मार्केट
दूसरे देशों पर नजर
लेकिन ट्रंप की लाख कोशिशों के बावजूद देश का सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता जा रहा है। पीटर जी पीटरसन फाउंडेशन के मुताबिक 2024 में अमेरिका की सरकार ने चुकाने में 880 अरब डॉलर खर्च किए जो अमेरिका के इतिहास में सबसे बड़ी रकम है। इस साल अमेरिका को इस मद में 1 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं। अमेरिका में करीब 12.8 करोड़ परिवार हैं। यानी हर परिवार को हर महीने 650 डॉलर कर्ज के ब्याज के रूप में देने पड़ रहे हैं। यही वजह है कि ट्रंप की नजर अब दूसरे देशों के संसाधनों पर है।













