निगरानी अभियान । राजधानी दिल्ली सहित उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, पंजाब सहित कई राज्यों में प्रदूषित पानी की समस्या से निपटने के लिए राज्य और केंद्र सरकारें मिलकर काम कर सकती हैं। दिल्ली में गर्मियों में पानी की कमी ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता की समस्या भी बड़ी चुनौती है। इसका कारण यमुना का प्रदूषण और कच्चे पानी का अस्थिर स्रोत जर्जर और पुरानी आपूर्ति नेटवर्क का सीवर से मिल जाने का जोखिम है। इसके अलावा, पानी की नियमित गुणवत्ता जांच भी नहीं की जाती।
पुरानी पाइपलाइन। दिल्ली का पीने का पानी मुख्यतः यमुना से आता है। कई रिपोर्ट में कहा गया है कि यमुना के पानी में अमोनिया जैसे प्रदूषक स्तर अधिक हैं। इसलिए उपचार के बाद भी आपूर्ति की गुणवत्ता प्रभावित होती है। कई इलाकों में 40-80 साल पुरानी पाइपलाइन है, जिससे पानी की गुणवत्ता बिगड़ रही है। सरकार ने बजट में पेयजल, स्वच्छता और जल संरचना के लिए 9,000 करोड़ रुपये दिए हैं। राशि का उपयोग नए बोरवेल, पाइपलाइन अपग्रेड, वर्षा जल संचयन और यमुना सफाई पर किया जाएगा।
जल जीवन मिशन । केंद्र ने 2025-26 के बजट में ‘जल जीवन मिशन’ के लिए 67,000 करोड़ दिए। सरकार ने मिशन के लक्ष्य को 2028 तक बढ़ाया है, ताकि देश के सभी ग्रामीण घरों में नल से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। मिशन के लागू होने से पहले करीब 3.24 करोड़ ग्रामीण घरों में टैप कनेक्शन था। अब 15.5 करोड़ से अधिक घरों को नल से पानी मिल रहा है। अमृत योजना 2015 में शुरू की गई। इसके तहत 4,700 से अधिक शहरों-नगर निकायों में पाइप जलापूर्ति विकसित करना है। अमृत 2.0 का अनुमानित बजट लगभग 2.77 लाख करोड़ से 2.99 लाख करोड़ रुपये तक है।
पेयजल परियोजनाएं । उत्तर प्रदेश में हर घर जल योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। मध्य प्रदेश में ‘हर घर नल से जल’ योजना की तरफ गहरा प्रयास किया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में भी ‘अमृत’ के तहत बड़ा निवेश हुआ है। भोपाल में 582 करोड़ रुपये की पेयजल परियोजना का शिलान्यास किया गया। इससे 3 साल में 100% पानी नेटवर्क लक्ष्य पूरा करना है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)














