रिलायंस कभी रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाली भारतीय कंपनी थी। कंपनी ने एक्स पर एक बयान जारी कर ब्लूमबर्ग की उस रिपोर्ट का खंडन किया है जिसमें दावा किया गया था कि रूस से तेल लेकर आ रहे तीन जहाज रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी की ओर बढ़ रहे हैं। कंपनी का बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका के साथ व्यापार को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि अगर भारत रूस से तेल की खरीद कम नहीं करता है तो भारत पर टैरिफ बढ़ाया जा सकता है।
10 साल में सबसे बड़ा दांव खेलने की तैयारी में रिलायंस, निवेशकों को कितना होगा फायदा?
शेयर का प्रदर्शन
रिलायंस का यह शेयर आज निफ्टी 50 इंडेक्स पर सबसे बड़े गिरावट के कारक के रूप में उभरा। इसने बेंचमार्क की कुल 91 अंकों की गिरावट में 72.5 अंकों का योगदान दिया। उसके बाद HDFC बैंक और ट्रेंट का नंबर रहा। रिलायंस के शेयर की कीमत में हाल ही में मिला-जुला रुझान देखा गया है। पिछले हफ्ते शेयर 0.54% गिरा और पिछले दो हफ्तों में 2.44% की गिरावट आई। मासिक आधार पर यह 0.55% नीचे है।
हालांकि तिमाही आधार पर रिलायंस ने 11.45% का मजबूत लाभ दर्ज किया है जबकि पिछले एक साल में यह शेयर 25.8% चढ़ा है। तकनीकी दृष्टिकोण से देखें तो शेयर मिड से लॉन्ग टर्म पीरियड के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज से ऊपर बना हुआ है। Trendlyne डेटा के अनुसार इसका रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 59.8 पर है, जिसे न्यूट्रल क्षेत्र माना जाता है। 30 से नीचे का RSI ओवरसोल्ड की स्थिति का संकेत देता है, जबकि 70 से ऊपर का स्तर ओवरबॉट का संकेत देता है। 11.52 मिनट पर कंपनी का शेयर 4.09% गिरावट के साथ 1513 रुपये पर ट्रेड कर रहा था।













