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  • कास्त्रो की क्रांति से डील करने चले डोनाल्ड ट्रंप, दुनिया में क्या होगा आगे?

    नई दिल्ली: वेनेजुएला में सैन्य दखल के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने जिन दूसरे देशों को धमकी दी है, उनमे क्यूबा भी है। अमेरिका के खिलाफ विद्रोह का सबसे मशहूर चेहरा बने फिदेल कास्त्रो आज क्या जवाब देते ट्रंप को। कास्त्रो के सिगार के धुएं ने नजर और भी धुंधली कर दी ट्रंप की।


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    By Azad Hind Desk जनवरी 8, 2026
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    नई दिल्ली: वेनेजुएला में सैन्य दखल के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने जिन दूसरे देशों को धमकी दी है, उनमे क्यूबा भी है। अमेरिका के खिलाफ विद्रोह का सबसे मशहूर चेहरा बने फिदेल कास्त्रो आज क्या जवाब देते ट्रंप को। कास्त्रो के सिगार के धुएं ने नजर और भी धुंधली कर दी ट्रंप की। उन्होंने आंखें सिकोड़ते हुए कहा, ‘धुआं यहां से निकल रहा और लोगों को लग रहा कि आग अमेरिका में लगी है। यह हमारे खिलाफ साजिश है। मैं इसे ठीक कर सकता हूं।’

    ‘ ‘कैसे? ‘डील। वेनेजुएला का तेल अब वेनेजुएला का नहीं है। वह तेल तुम्हें मिलता था, पर अब नहीं मिलेगा। लेकिन, मिल भी सकता है। तुम हमसे हाथ मिला लो। क्यूबा को डॉलर चाहिए।’ ‘नहीं, कुछ लोगों के लिए सम्मान काफी है। क्रांति सौदेबाजी नहीं होती। यह लड़ाई है जीवन से मौत तक की। यह संघर्ष विचारों का है, बस तेल या डील का नहीं।’ ‘तुम्हारे विचार तुम्हें बचा नहीं सकते। मुझे लड़ाई जीतनी आती है।’ ‘और मुझे आता है लड़ते हुए टिके रहना, वह भी अपने बल पर।

    कौन थे फिदेल कास्त्रो

    फिदेल कास्त्रो क्यूबा के क्रांतिकारी और ताकतवर साम्यवादी नेता थे जिन्होंने 1959 से 2008 तक क्यूबा पर अपना शासन किया। उन्होंने क्यूबा को पश्चिमी गोलार्ध का पहला साम्यवादी राज्य बनाया, समाजवादी सुधार लागू किए और शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ के साथ मजबूत संबंध स्थापित किए।

    उन्होंने क्यूबा क्रांति के माध्यम से तानाशाह फुल्गेन्सियो बतिस्ता को गद्दी पर से उखाड़ फेंकने के बाद सत्ता संभाली, प्रधान मंत्री और फिर राष्ट्रपति (1976-2008) बने, उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया और व्यापक स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा प्रदान की, हालांकि उनके शासनकाल में अधिनायकवाद और असहमति का दमन भी देखने को मिला।

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