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  • नेपाल-बांग्लादेश-श्रीलंका… महिंदा राजपक्षे के बेटे की भारत से बड़ी अपील, जानें मोदी सरकार से क्या कहा

    कोलंबो: श्रीलंका के सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के बेटे नमल राजपक्षे ने भारत से दक्षिण एशिया में बड़ी भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के सामने आने वाली साझा सुरक्षा और राजनीतिक चुनौतियों से निपटने में भारत एक अहम भूमिका निभा सकता है। नमल ने दक्षिण एशिया में मजबूत


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    By Azad Hind Desk जनवरी 8, 2026
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    कोलंबो: श्रीलंका के सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के बेटे नमल राजपक्षे ने भारत से दक्षिण एशिया में बड़ी भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के सामने आने वाली साझा सुरक्षा और राजनीतिक चुनौतियों से निपटने में भारत एक अहम भूमिका निभा सकता है। नमल ने दक्षिण एशिया में मजबूत क्षेत्रीय सहयोग की भी अपील की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में की गई उनकी ये टिप्पणियां हाल के सालों में श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में लगातार राजनीतिक अशांति के माहौल में आई हैं। नमल वर्तमान में श्रीलंका की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी श्रीलंका पोदुजना पेरामुना के अधोषित प्रमुख हैं।

    नमल राजपक्षे ने एक्स पर क्या लिखा

    नमल राजपक्षे ने एक्स पर लिखा, “हाल ही में हुई कई ग्लोबल सिक्योरिटी घटनाओं के बीच, दक्षिण एशिया में मजबूत क्षेत्रीय सहयोग की बढ़ती और जरूरी जरूरत है, जिसमें भारत अहम भूमिका निभा सकता है। पिछले कुछ सालों में, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका में राजनीतिक उथल-पुथल का दौर रहा है, जिसमें जनता का असंतोष और सरकारों में बदलाव देखने को मिले हैं। कई बार, इन गड़बड़ियों को चरमपंथी तत्वों ने समर्थन दिया और बढ़ावा दिया। इन चुनौतियों से निपटने के लिए चरमपंथ का मुकाबला करने, राजनीतिक हिंसा को रोकने और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता की जरूरत है।”

    दक्षिण एशिया में तालमेल और सहयोग पर जोर

    उन्होंने आगे लिखा, “इसलिए, दक्षिण एशिया को उभरते संकटों का सामना करने और साझा चुनौतियों का मिलकर जवाब देने के लिए ज्यादा क्षेत्रीय तालमेल की जरूरत है। इस संदर्भ में, क्षेत्र में लंबे समय तक शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत का नेतृत्व बहुत जरूरी है। विकास और स्थिरता पर केंद्रित समान लक्ष्यों के साथ, पूरा दक्षिण एशिया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा प्रभाव डाल सकता है, और इस प्रक्रिया में, लंबे समय तक शांति और तालमेल के लिए क्षेत्रीय एकता बहुत जरूरी है। बांग्लादेश और नेपाल में होने वाले चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के जरिए लोकतांत्रिक वैधता की पुष्टि करने का एक उम्मीद भरा मौका देते हैं, जो क्षेत्रीय सुरक्षा को और मजबूत करने में योगदान देगा।”

    श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल में क्या हुआ

    श्रीलंका में 2022 में आर्थिक संकट के बाद देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। इस कारण तत्कालीन राष्ट्रपति और नमल राजपक्षे के चाचा गोटबाया राजपक्षे को देश छोड़कर भागना पड़ा था। इतना ही नहीं, इस विरोध प्रदर्शन ने नमल के पिता महिंदा राजपक्षे के राजनीतिक करियर को भी खत्म कर दिया था। बांग्लादेश में भी 2024 से लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिस कारण शेख हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा था और मोहम्मद यूनुस देश के अलोकतांत्रिक सरकार के मुखिया बने। नेपाल में भी 2025 में जेन-जी विद्रोह के कारण केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था।

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