इस गिरावट का असर बाजार की कुल पूंजी पर भी पड़ा है। बीएसई पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का मार्केट कैप चार दिनों में 9.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा घटकर 472 लाख करोड़ रुपये रह गया है। यानी निवेशकों को 4 दिनों में करीब 10 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो गया है। वहीं इन चार दिनों में सेंसेक्स में करीब 1580 अंकों की गिरावट आई।
शेयर बाजार में भारी गिरावट के बीच उछला मुकेश अंबानी का यह स्टॉक, रिलायंस की है बड़ी हिस्सेदारी
बाजार में गिरावट के 5 कारण
1. ट्रंप का 500 फीसदी टैरिफ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले एक बिल का समर्थन किया है। इस बिल के तहत रूस से होने वाले आयात पर 500% से ज्यादा का शुल्क लगाया जा सकता है। ट्रंप इस बिल का इस्तेमाल भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं, क्योंकि ये देश रूस से सस्ते दामों पर तेल खरीद रहे हैं। हालांकि, यह बिल अभी पास नहीं हुआ है, लेकिन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि इस पर अगले हफ्ते वोटिंग हो सकती है।
2. बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट
गुरुवार को बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 1% तक गिर गए। इस हफ्ते की शुरुआत में, इन दोनों दिग्गज कंपनियों के शेयरों में 4% तक की गिरावट आई थी, जिसने बाजार की गिरावट को और बढ़ा दिया। मेटल इंडेक्स 1.9% गिर गया। आईटी इंडेक्स 1% नीचे आया।
3. वेनेजुएला में उथल-पुथल
वेनेजुएला में चल रही उथल-पुथल का असर ज्यादातर कमोडिटी बाजार पर दिख रहा है। अचानक हुई इस उथल-पुथल ने भू-राजनीतिक अनिश्चितता को बढ़ा दिया है, खासकर वेनेजुएला के पेट्रोलियम भंडार को लेकर। इससे वैश्विक तेल बाजारों पर असर पड़ सकता है। इसका असर भी शेयर बाजार में दिखाई दिया।
4. वैश्विक बाजारों में सुस्ती
गुरुवार को एशियाई शेयर बाजार ज्यादातर गिरावट में रहे। साल की मजबूत शुरुआत के बाद निवेशकों में सावधानी का माहौल था। जापान को छोड़कर एशिया-प्रशांत शेयरों का MSCI का सबसे व्यापक सूचकांक 0.6% गिर गया, जबकि जापान का निक्केई 1.2% और चीन का CSI300 ब्लू-चिप इंडेक्स 0.8% नीचे आ गया। अमेरिका का नैस्डैक फ्यूचर्स 0.35% नीचे था।
5. विकास दर में नरमी की आशंका
घरेलू विकास को लेकर चिंताएं भी निवेशकों की सावधानी में इजाफा कर रही हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने वित्त वर्ष 2026 में भारत की जीडीपी में 7.4% की वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो ICRA के अनुमान के अनुरूप है। हालांकि, वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में विकास दर में नरमी आने की उम्मीद है। ICRA का अनुमान है कि वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में 8.0% की तुलना में दूसरी छमाही में विकास दर घटकर 6.9% हो जाएगी। विकास की उम्मीदों में यह नरमी बाहरी झटकों के साथ मिलकर, निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना रही है। निवेशक भू-राजनीतिक और व्यापारिक अनिश्चितताओं के साथ-साथ घरेलू मांग में धीमी गति को भी ध्यान में रख रहे हैं।













