पाकिस्तान की असीम मुनीर सरकार अब तक संप्रभुता का हवाला देकर चीनी सुरक्षाकर्मियों को अपने यहां नहीं आने दे रही थी। इसको लेकर पिछले कई साल से चीन पाकिस्तानी सेना पर दबाव बना रहा था। सीएनएन न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सेना अब झुक गई है और देश में चीनी सुरक्षा चौकी का रास्ता साफ हो गया है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर के बेहद करीबी मोहसिन नकवी ने चीनी नेतृत्व के साथ बीजिंग में रणनीतिक वार्ता की है। साल 2014 से लेकर अब तक पाकिस्तान में चीन के सीपीईसी प्रोजेक्ट और अन्य निर्माण कार्य में लगे करीब 90 चीनी नागरिक विभिन्न हमलों में मारे जा चुके हैं।
ग्वादर से लेकर इस्लामाबाद तक तैनात होगी सेना
बलूच विद्रोही लगातार चीन को धमकी दे रहे हैं कि वह अपना सीपीईसी प्रोजेक्ट बलूचिस्तान से बाहर ले जाए। रिपोर्ट के मुताबिक मोहसिन नकवी ने चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय के साथ एक गोपनीय समझौता किया है। इस समझौते के तहत पाकिस्तान ने चीन से वादा किया है कि एक व्यापक और ज्यादा प्रभावी सुरक्षा ढांचा बनाया जाएगा जिसमें स्पेशल प्रोटेक्शन यूनिट बनाया जाएगा जो खासतौर पर चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए होगा। इस स्पेशल प्रोटेक्शन यूनिट को खासतौर पर बड़े शहरी और रणनीतिक स्थानों जैसे राजधानी इस्लामाबाद, लाहौर, कराची, क्वेटा, सूक्कूर, पेशावर, ग्वादर और पीओके का हिस्सा गिलगिल बाल्टीस्तान में बनाया जाएगा।
यह स्पेशल यूनिट वर्तमान सैन्य तैनाती के साथ काम करेगी और सीपीईसी के प्रमुख प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करेगी। सूत्रों का कहना है कि चीन पाकिस्तान पर दबाव डाल रहा है कि वह परंपरागत सैन्य चौकियों से आगे बढ़े और चीनी नागरिकों के करीब लेयर्ड, स्थानीय सुरक्षा तंत्र और हथियारों की तैनाती करे। इसमें चीन पाकिस्तानी पुलिस को ट्रेनिंग देगा, खुफिया जानकारी और ज्यादा साझा करेगा। इसके अलावा एक समन्वित आतंकवाद रोधी तंत्र बनाया जाए जिसमें पाकिस्तानी और चीनी सुरक्षा एजेंसी शामिल हों।
इशाक डार और नकवी ने चीन से क्या कहा?
चीन के इस दबाव के बाद अब पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार और गृहमंत्री मोहसिन नकवी दोनों ने चीनी अधिकारियों को आश्वासन दिया है कि उनकी सरकार हर स्तर पर कड़े उपाय कर रही है। सुरक्षा खामी को दूर किया जा रहा है। चीन ने पाकिस्तान में सीपीईसी प्रोजेक्ट में करीब 60 अरब डॉलर का निवेश किया है। पाकिस्तान सीपीईसी को सुरक्षा नहीं दे पा रहा है जिससे चीन भड़का हुआ है। चीन ने साफ कर दिया है कि वह चीनी नागरिकों पर हमले बर्दाश्त नहीं करेगा।














