रिलायंस इंडस्ट्रीज के एक प्रवक्ता ने रॉयटर्स को भेजे गए ईमेल के जवाब में कहा, ‘हम गैर-अमेरिकी खरीदारों द्वारा वेनेजुएला के तेल तक पहुंच के बारे में स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं और अनुपालन तरीके से तेल खरीदने पर विचार करेंगे।’ कैराकस और वाशिंगटन ने इस हफ्ते अमेरिकी सेना द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका को 2 अरब डॉलर तक के वेनेजुएला के कच्चे तेल (करीब 30 से 50 मिलियन बैरल) निर्यात करने के लिए एक सौदा किया है।
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मार्च में किया था बंद
रिलायंस ने मार्च 2025 से वेनेजुएला का तेल खरीदना बंद कर दिया था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका ने दक्षिण अमेरिकी देश से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 25% टैरिफ की घोषणा की थी। कंपनी को वेनेजुएला का आखिरी तेल मई में मिला था। अब चूंकि वेनेजुएला पर अमेरिका का कंट्रोल हो गया है। ऐसे में हालात अब बदल गए हैं। अब वेनेजुएला के तेल को अमेरिका बेचेगा। शायद यही कारण है कि रिलायंस ने वेनेजुएला का तेल खरीदने में इच्छा जताई है।
वेनेजुएला का तेल प्रोसेस करने की क्षमता
- रिलायंस की गुजरात राज्य में दो रिफाइनरियां हैं।
- ये रिफाइनरियां हर दिन लगभग 1.4 मिलियन बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस कर सकती हैं।
- इन प्लांटों की जटिल बनावट के कारण रिलायंस की रिफाइनरियां वेनेजुएला के गाढ़े कच्चे तेल को भी प्रोसेस कर सकती हैं।
- यह रिलायंस के लिए फायदेमंद है क्योंकि वे ऐसे तेलों का उपयोग करके उत्पादन लागत कम कर सकते हैं।
रूसी तेल खरीद पर लगाए ब्रेक
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रूस तेल खरीदना लगभग बंद कर दिया है। हाल में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा है कि जनवरी में उन्हें रूस से तेल मिलने की उम्मीद नहीं है। रिलायंस पिछले साल रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाली भारतीय कंपनी थी।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एक्स पर एक बयान में कहा कि जामनगर रिफाइनरी को पिछले करीब तीन हफ्तों से रूस से तेल का कोई जहाज नहीं मिला है और जनवरी में भी रूस से कच्चे तेल की कोई डिलीवरी मिलने की उम्मीद नहीं है। कंपनी ने पिछले हफ्ते आई एक मीडिया रिपोर्ट को भी गलत बताया। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि रूस से तेल लदे तीन जहाज रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी की ओर आ रहे थे।













