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  • 8वें पे कमीशन के बाद प्राइवेट नौकरी करने वालों को खुश करने की बारी, क्या करने जा रही है सरकार?

    नई दिल्ली: करोड़ों कर्मचारियों को सोशल सिक्योरिटी के दायरे में लाने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। EPFO की मंथली सैलरी लिमिट को मौजूदा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 से 30,000 रुपये करने का प्रस्ताव एक बार फिर चर्चा में है। सैलरी लिमिट का मतलब वह बेसिक सैलरी है, जिस पर


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    By Azad Hind Desk जनवरी 9, 2026
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    नई दिल्ली: करोड़ों कर्मचारियों को सोशल सिक्योरिटी के दायरे में लाने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। EPFO की मंथली सैलरी लिमिट को मौजूदा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 से 30,000 रुपये करने का प्रस्ताव एक बार फिर चर्चा में है। सैलरी लिमिट का मतलब वह बेसिक सैलरी है, जिस पर किसी कर्मचारी के लिए पीएफ (PF) में योगदान देना कानूनी रूप से जरूरी होता है। मौजूदा नियम के मुताबिक, अगर आपकी बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से ज्यादा है तो पीएफ कटवाना आपकी मर्जी पर निर्भर करता है।

    ET के मुताबिक, सरकार ने पहले भी इस लिमिट को 25,000 रुपये करने पर विचार किया था। हालांकि तब कंपनियों के विरोध की वजह से इसे टाल दिया गया था। कंपनियों का कहना था कि इससे उन पर बोझ बढ़ेगा। दूसरी ओर, कर्मचारी यूनियन इस लिमिट को 30,000 रुपये करने की मांग कर रही हैं। पीएफ की मौजूदा 15,000 रुपये की लिमिट आज से करीब 10 साल पहले सितंबर 2014 में तय की गई थी। तब से अब तक सैलरी में काफी इजाफा हो चुका है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी लेबर मिनिस्ट्री से कहा है कि वह चार महीने के अंदर इस लिमिट की समीक्षा करे।

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    क्या होगा फायदा?

    इस बदलाव से पीएफ सब्सक्राइबर्स की संख्या काफी बढ़ जाएगी। खासकर असंगठित क्षेत्र के ज्यादा से ज्यादा कर्मचारी रिटायरमेंट फंड के दायरे में आ सकेंगे। अधिकारियों का कहना है कि सैलरी लिमिट बढ़ने से रिटायरमेंट के समय कर्मचारियों के पास एक मोटी रकम जमा होगी, क्योंकि ज्यादा पैसा कटने पर कंपाउंडिंग का फायदा भी ज्यादा मिलेगा। हाल ही में EPFO ने पैसा निकालने के नियमों में ढील देते हुए यह भी अनिवार्य किया है कि सब्सक्राइबर के खाते में कम से कम 25% बैलेंस बना रहे।

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