इसके अलावा, विदेशी एक्सचेंज, प्राइवेट डिजिटल वॉलेट और डीसेंट्रलाइज्ड प्लैटफॉर्म्स की वजह से अधिकारियों के लिए यह पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है कि टैक्स के दायरे में आने वाली कमाई कितनी है। इसमें असली मालिक की पहचान आसानी से नहीं हो पाती, जिससे पूरी संपत्ति और लेनदेन पारदर्शी नहीं रहते। टैक्स विभाग ने विदेशी क्रिप्टो ट्रांजेक्शन में आने वाली कानूनी दिक्कतों का भी जिक्र किया। चूंकि इसमें कई देश शामिल हो सकते हैं, इसलिए पैसों के लेनदेन की जांच करना और बकाया टैक्स वसूलना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
क्रिप्टोकरेंसी पर वेनेजुएला का असर, बिटकॉइन 94000 डॉलर के पार, रिपल 11% चढ़ी
हिसाब-किताब लगाना मुश्किल
हालांकि, पिछले कुछ महीनों में देशों के बीच जानकारी साझा करने की कोशिशें हुई हैं। लेकिन टैक्स अधिकारियों के लिए अब भी लेनदेन की कड़ियों को जोड़ना और सही हिसाब-किताब लगाना बहुत मुश्किल बना हुआ है। भारत उन देशों में शामिल है, जो भारी दबाव और लॉबिंग के बावजूद क्रिप्टोकरंसी को मंजूरी देने से कतरा रहे हैं। जांच एजेंसियां भी इस बात से डरी हुई हैं कि इनका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के लिए किया जा सकता है।












