ओवैसी ने याद दिलाया कि यूपीए सरकार के दौरान गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) में संशोधन किया गया था। तब आतंकवाद की परिभाषा में कुछ ऐसी बातें जोड़ी गईं थीं, जिन पर उन्होंने सवाल उठाए थे। ओवैसी ने 2007 या 2008 में लोकसभा में पूछा था कि ‘किसी भी अन्य तरीके से, चाहे वह किसी भी प्रकृति का हो’ का क्या मतलब है?
कांग्रेस पर साधा निशाना
ओवैसी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने ही यह कानून बनाया था। उन्होंने पहले ही कहा था कि इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है। आज उसी कानून के आधार पर दो नौजवानों को जमानत नहीं मिल रही है। इनमें से एक तो साढ़े पांच साल से जेल में है। ओवैसी ने सवाल उठाया कि क्या आजादी के बाद कांग्रेस पार्टी का कोई नेता एक साल, दो साल या साढ़े पांच साल जेल में रहा है?
यह बात उन्होंने भारत की लोकसभा में कही थी, जो रिकॉर्ड है। उन्होंने क्लॉज 43D का जिक्र करते हुए 180 दिनों की हिरासत के बारे में बात की थी। ओवैसी ने पूरा भरोसा जताते हुए कहा था कि ऐसे 100 फीसदी मामलों में, जहां अल्पसंख्यकों को गिरफ्तार किया जाता है, उन्हें चार्जशीट दाखिल होने से पहले 180 दिनों तक हिरासत में रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि असलियत यही है कि सच्चाई और उम्मीद में बहुत बड़ा अंतर है। ओवैसी ने यह भी कहा कि वर्दी वाले लोगों के मन में एक तरह की नफरत होती है। उन्होंने फिर से दोहराया कि उन्हें 180 दिनों तक हिरासत में रखा जाएगा।
‘…जमानत मिलना बहुत मुश्किल’
ओवैसी ने यह भी बताया कि UAPA एक ऐसा कानून है जो आतंकवाद से जुड़े मामलों को देखता है। इसमें कुछ ऐसी धाराएं हैं जिनकी वजह से जमानत मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है। खासकर तब, जब किसी पर आतंकवाद फैलाने या उससे संबंधित गतिविधियों में शामिल होने का आरोप हो। इस कानून के तहत, अगर अदालत को लगता है कि आरोप सही हैं, तो वह जमानत देने से मना कर सकती है। यह कानून सरकार को भी संदिग्ध व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई करने की शक्ति देता है।














