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  • कैबिनेट सेक्रेटरी को यह गलतफहमी कैसे हुई? सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के मुख्य सचिवों को फटकार के साथ ही पूछा सवाल

    नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्राइवेट यूनिवर्सिटीज से जुड़ी जानकारी नहीं देने को लेकर फटकार लगाई है। खास बात है कि यह जानकारी दो महीने पहले कोर्ट की तरफ से आदेश दिए गए एक बड़े ऑडिट का हिस्सा थी। शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान


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    By Azad Hind Desk जनवरी 9, 2026
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    नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्राइवेट यूनिवर्सिटीज से जुड़ी जानकारी नहीं देने को लेकर फटकार लगाई है। खास बात है कि यह जानकारी दो महीने पहले कोर्ट की तरफ से आदेश दिए गए एक बड़े ऑडिट का हिस्सा थी। शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान मौजूद न रहने वालों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी दे डाली। मामले की सुनवाई जस्टिस एहसानुद्दीन अमानुल्लाह और एन वी अंजारिया की बेंच ने की। शीर्ष अदालत ने इस मामले में कैबिनेट सचिव को गलतफहमी होने को लेकर भी सवाल उठाया।

    किन-किन राज्यों ने नहीं दी जानकारी?

    बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि पालन के संबंध में, जिन राज्यों ने हलफनामा दायर नहीं किया है, वे बिना किसी समय विस्तार की मांग किए, हलफनामा दायर न करने के लिए मुख्य सचिव के जरिये स्पष्टीकरण फाइल करें। अदालत ने कहा कि इन राज्यों में बिहार, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गोवा, ओडिशा, पुडुचेरी, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इसके अलावा, जिन राज्यों ने दिन के अंत तक हलफनामा दायर करने पर सहमति व्यक्त की, उन्हें इस आदेश से छूट दे दी गई।

    आदेश में आगे कहा गया कि राज्यों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया जाए। वे बताएं कि कोर्ट में उनकी मौजूदगी सुनिश्चित न करने के लिए उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही क्यों शुरू न की जाए। इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, दमन और दीव और चंडीगढ़ भी शामिल थे।

    क्या है पूरा मामला?

    20 नवंबर, 2025 को कोर्ट ने अलग-अलग मंत्रालयों के तहत सभी यूनिवर्सिटी की स्थापना, मैनेजमेंट और रेगुलेशन से जुड़ी जानकारी देने के लिए बड़े निर्देश जारी किए थे। इसके अलावा, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) को एडमिशन और भर्ती पर पॉलिसी जमा करने और यह बताने का निर्देश दिया गया। इसमें पूछा गया था कि ‘नो प्रॉफिट, नो लॉस’ अप्रोच को कैसे लागू किया जा रहा है।

    जब लगभग दो महीने बाद इस मामले पर सुनवाई हुई, तो कोर्ट ने पाया कि कैबिनेट सेक्रेटरी के बजाय, केंद्र सरकार के उच्च शिक्षा सचिव ने हलफनामा दायर किया था। इससे जज नाराज हो गए। बेंच ने कहा कि हमें हैरानी है कि कैबिनेट सेक्रेटरी को यह गलतफहमी कैसे हुई। हम उनसे इतनी लापरवाही की उम्मीद नहीं करते।

    कोर्ट ने केंद्र से अपने हलफनामे पर फिर से विचार करने को कहा। इसकी वजह है कि पिछले आदेश में मेडिकल, इंजीनियरिंग और कृषि यूनिवर्सिटी के साथ-साथ अलग-अलग मंत्रालयों के प्रशासनिक कंट्रोल वाली अन्य यूनिवर्सिटी के बारे में भी जानकारी मांगी गई थी।

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