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  • ट्रंप के टैरिफ को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? भारत पर कितना असर, जानें पूरी डिटेल

    नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को लेकर शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पर दुनियाभर की नजरें टिकी थीं। हालांकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इस अहम मामले में कोई फैसला नहीं सुनाया। यह मामला राष्ट्रपति ट्रंप की शक्तियों की सीमा को भी परखता है। यह फैसला राष्ट्रपति ट्रंप के 1977 के


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    By Azad Hind Desk जनवरी 9, 2026
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    नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को लेकर शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पर दुनियाभर की नजरें टिकी थीं। हालांकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इस अहम मामले में कोई फैसला नहीं सुनाया। यह मामला राष्ट्रपति ट्रंप की शक्तियों की सीमा को भी परखता है। यह फैसला राष्ट्रपति ट्रंप के 1977 के एक कानून का इस्तेमाल करके लगाए गए टैरिफ से जुड़ा है। यह कानून राष्ट्रीय आपातकाल के लिए बनाया गया था। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह कानून जनवरी 2025 में पद पर लौटने के बाद इस्तेमाल किया।

    इन टैरिफ को उन व्यवसायों और 12 अमेरिकी राज्यों ने चुनौती दी थी, जिन पर इसका असर पड़ा था। इनमें से ज्यादातर राज्य डेमोक्रेटिक पार्टी के शासन वाले थे। निचली अदालतों ने पहले ही फैसला सुनाया था कि ट्रंप ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया है। 5 नवंबर को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान वहां मौजूद सभी जजों ने इन टैरिफ की वैधता पर सवाल उठाए थे।
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    इस एक्ट का किया इस्तेमाल

    राष्ट्रपति ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (International Emergency Economic Powers Act) के तहत कई देशों से आने वाले सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाए थे। उनका कहना था कि व्यापार घाटा एक राष्ट्रीय आपातकाल है।

    उन्होंने इसी कानून का इस्तेमाल चीन, कनाडा और मैक्सिको पर भी टैरिफ लगाने के लिए किया था। उन्होंने इन देशों से होने वाली फेंटानिल और अन्य अवैध नशीली दवाओं की तस्करी को राष्ट्रीय आपातकाल बताया था। ट्रंप का कहना है कि टैरिफ ने अमेरिका को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है। उन्होंने 1 जनवरी को कहा था कि टैरिफ के खिलाफ कोई भी फैसला एक ‘भयानक झटका’ होगा।

    भारत पर क्या पड़ेगा असर

    शुक्रवार को फैसला न आने के कारण भारत के सामानों पर लगने वाले ऊंचे शुल्क फिलहाल जारी रहेंगे। इससे व्यापार में अनिश्चितता बनी हुई है। वाशिंगटन ने 2025 में भारतीय निर्यात पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। बाद में अगस्त में भारत द्वारा रूस से तेल आयात जारी रखने को लेकर हुए विवादों के बीच, इनमें से कुछ शुल्कों को बढ़ाकर 50% कर दिया गया था।

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