आरबीआई गवर्नर ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि डिजिटल माध्यम से लोगों तक बैंकिंग पहुंचाना और सुविधाएं देना आसान हुआ है। लेकिन सुरक्षा का इंतजाम न होना, ग्राहकों से छिपे हुए चार्ज (हिडन चार्ज) वसूलना, उन्हें पूरी जानकारी न देना और कर्ज वसूली के गलत तरीके अपनाने के नुकसान भी हो सकते हैं।
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कैसे होगी बैंकों की निगरानी?
मल्होत्रा ने कहा कि डिजिटलाइजेशन से बैंकिंग का दायरा बढ़ा है और काम में तेजी आई है, लेकिन साथ ही इसने रिस्क को भी बढ़ा दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि बैंकों को आपस में तालमेल बिठाना चाहिए ताकि फर्जी खातों (म्यूल अकाउंट्स) और संदिग्ध लेन-देन का समय रहते पता लगाया जा सके। डेटा के इस्तेमाल पर उन्होंने कहा कि अब ऐसी तकनीक तैयार की जानी चाहिए जिससे हर समय बैंकों की निगरानी हो सके।













