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  • अगला सूर्य ग्रहण कब है, तारीख और समय दोनों जानें, कहां-कहां दिखाई देगा

    नई दिल्ली: अगला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को है। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण (annular solar eclipse) होगा। यह सूर्य ग्रहण दक्षिण अफ्रीका, अर्जेंटीना और अंटार्कटिका के दूरदराज के हिस्से में दिखाई देगा। इसे भारत में नहीं देखा जा सकेगा। बड़ी बात यह है कि इसी दिन चीनी चंद्र नव वर्ष (Chinese Lunar New


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    By Azad Hind Desk जनवरी 10, 2026
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    नई दिल्ली: अगला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को है। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण (annular solar eclipse) होगा। यह सूर्य ग्रहण दक्षिण अफ्रीका, अर्जेंटीना और अंटार्कटिका के दूरदराज के हिस्से में दिखाई देगा। इसे भारत में नहीं देखा जा सकेगा। बड़ी बात यह है कि इसी दिन चीनी चंद्र नव वर्ष (Chinese Lunar New Year) भी है। 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य को लगभग 96% ढक लेगा और सूर्य आग के छल्ले जैसा दिखेगा। इस घटना को 2 मिनट 20 सेकंड तक देखा जा सकेगा।

    17 फरवरी को लगने वाले सूर्य ग्रहण का समय

    17 फरवरी 2026 को आंशिक ग्रहण 9:56 UTC (3.26 PM) पर शुरू होगा। वलयाकार ग्रहण 11:42 UTC (05:12 PM) पर शुरू होगा। यह सूर्य ग्रहण 12:12 UTC (5:42 PM) पर चरम पर होगा। इस दौरान सूर्य रिंग ऑफ फायर की तरह दिखाई देगा। हालांकि, लगभग 2:20 मिनट बाद ग्रहण कम होना शुरू हो जाएगा। यह सूर्य ग्रहण 14:27 UTC (07:57 PM) पर खत्म हो जाएगा।

    किन-किन देशों में दिखेगा सूर्य ग्रहण

    17 फरवरी को लगने वाला सूर्य ग्रहण अटार्कटिका, अर्जेंटीना, बोत्सवाना, ब्रिटिश इंडियन ओशन क्षेत्र, चिली, कोमोरोस, इस्वातिनी (स्वाजीलैंड), फ्रांसीसी दक्षिणी क्षेत्र, लेसोथो, मेडागास्कर, मलावी, मॉरीशस, मायोटे, मोजाम्बिक, नामीबिया, रियूनियन आईलैंड्स, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिणी जॉर्जिया/सैंडविच आईलैंड्स, तंजानिया, जाम्बिया और जिम्बॉब्वे में देखा जाएगा।

    सूर्य ग्रहण कब होता है

    सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और पृथ्वी पर छाया डालता है। ये केवल अमावस्या को ही हो सकता है। 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी, 2026 को एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। सूर्य ग्रहण चार प्रकार के होते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि घटना के समय सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी कैसे संरेखित होते हैं। सूर्य ग्रहण हमेशा चंद्र ग्रहण से लगभग दो सप्ताह पहले या बाद में होता है।

    पूर्ण सूर्य ग्रहण: सूर्य पूरी तरह से चंद्रमा से ढक जाता है। इस दौरान दिन के समय रात जैसे हालात बन जाते हैं, जो चंद मिनटों का होता है।

    आंशिक सूर्य ग्रहण: चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से नहीं ढक पाता है, इसलिए सूर्य का केवल एक हिस्सा ही ढका होता है। यहां चंद्रमा सूर्य के एक हिस्से को ढंकता हुआ नजर आता है।

    वलयाकार सूर्य ग्रहण: चंद्रमा सूर्य के सामने केंद्र में होता है लेकिन पूरी सतह को नहीं ढक पाता है। इस दौरान चंद्रमा के चारों ओर “आग का छल्ला” चमकता है।

    हाइब्रिड सूर्य ग्रहण: सबसे दुर्लभ सूर्य ग्रहण टोटल और एनुलर ग्रहण का कॉम्बिनेशन होता है। यह तब होता है जब चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर से गुजरती है। ये एक तरह के ग्रहण के रूप में शुरू होते हैं और दूसरे में बदल जाते हैं।

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