हालांकि अब जबकि अमेरिका और चीन जैसे देश छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान बना रहे हैं, उस वक्क एफ-5 की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं, खासकर भारत के लिए, जिसका दुश्मन चीन है और जिसके पास दो तरह के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान (J-20, J-35) हैं और जो छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान बना रहा है। फिर भी, भारत के लिए राफेल एक बेहतर विकल्प है, खासकर उस वक्त जब अमेरिकी एफ-35 खरीदा नहीं जा सकता और सुखोई-57 स्टील्थ फाइटर जेट पर विश्वास नहीं है। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि भारत शायद 20 राफेल एफ5 खरीद सकता है, जबकि बाकी राफेल एफ4 होंगे, जिनका मेक इन इंडिया के तहत प्रोडक्शन हो सकता है। ऐसी रिपोर्ट है कि 60 प्रतिशत प्रोडक्शन भारत में होगा।
राफेल F5 एक साथ कई मिशन को दे सकता है अंजाम
राफेल F5 लड़ाकू विमान एक ट्विन-जेट फाइटर एयरक्राफ्ट है जो एयरक्राफ्ट कैरियर से समुद्री फाइटर के तौर पर और जमीन पर आधारित फाइटर के तौर पर काम कर सकता है। राफेल ने अभी तक ओपन मार्केट में काफी बेहतरीन प्रदर्शन किया है और यही वजह है कि राफेल के पास ऑर्डर्स की भरमार है। राफेल एफ-5 की सबसे बड़ी खासियत इसकी “ओम्निरोल” क्षमता है, जिससे यह एक ही उड़ान में कई मिशन (हवा से हवा में, जमीन पर हवाई हमला, जासूसी) जैसे मिशन को अंजाम दे सकता है। अमेरिकी पत्रिका में कहा गया है कि पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर की तुलना में यह ज्यादा किफायती है। लेकिन ऐसा लगता नहीं है। राफेल लड़ाकू विमान को खरीदने से लेकर इसके मेटिनेंस में अच्छा खासा बजट लगता है।
राफेल F5 अपने 14 बाहरी हार्ड पॉइंट्स पर मजबूत हथियार सिस्टम युद्ध के दौरान ले जा सकता है। इनमें Meteor बियॉन्ड विज़ुअल रेंज हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, Mica हीट-सीकिंग और रडार-सीकिंग हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, AIM-9 साइडविंडर हीट-सीकिंग हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, और हवा से हवा में मार करने वाले मिशन के लिए AIM-120 AMRAAM रडार-गाइडेड मिसाइल शामिल हैं। जो राफेल को अपने प्रतिद्वंदियों से काफी आगे ले जाती है। इसके अलावा AGM-84 हार्पून एंटी-शिप मिसाइल, SCALP-EG स्टैंड-ऑफ क्रूज मिसाइल, हैमर एयर-टू-ग्राउंड बम, AM-39 एक्सोसेट एंटी-शिप मिसाइल, साथ ही एयर-टू-सरफेस मिशन के लिए पारंपरिक और स्मार्ट बम होते हैं। इस एयरक्राफ्ट की बाहरी लोड उठाने की क्षमता 20,000 पाउंड से ज्यादा है। साथ ही राफेल में 2,500 राउंड वाली एक पावरफुल नेक्सटर 30M791 30mm तोप भी लगी है।
F-5 सुपर राफेल है एक शानदार लड़ाकू विमान
F5 सुपर राफेल एक बेहतरीन फाइटर जेट कहा जा सकता है। इसके एक बार में अलग अलग मिशन अंजाम दिए जा सकते हैं। ये एक मल्टीरोल एयरक्राफ्ट है, जिसमें एडवांस्ड एवियोनिक्स, एक मजबूत इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और शानदार मैन्यूवरेबिलिटी है। इसके अलावा, सैफ्रान, डसॉल्ट राफेल F5 के लिए M88 इंजन का एक अपग्रेडेड वर्जन डेवलप कर रहा है, जिसका नाम M88 T-REX है। यह इंजन मौजूदा M88 के मुकाबले 20 प्रतिशत ज्यादा थ्रस्ट जेनरेट करेगा, जो आफ्टरबर्नर के साथ नौ मीट्रिक टन (88.2 किलोन्यूटन/19,841 पाउंड) तक पहुंचेगा। M88 T-REX राफेल के एयरफ्रेम में बिना किसी बदलाव के राफेल के परफॉर्मेंस और क्षमताओं को बढ़ाएगा और इसे राफेल F5 में इंटीग्रेट करने की योजना है।
यह फाइटर जेट एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA) RBE2 रडार से लैस है जो एक साथ 40 टारगेट को ट्रैक कर सकता है और एक साथ चार टारगेट पर हमला कर सकता है। राफेल का डेल्टा विंग और कैनार्ड कॉन्फ़िगरेशन, फ्लाई-बाय-वायर कंट्रोल के साथ मिलकर इसे जबरदस्त फुर्ती देता है। यह बिना रिफ्यूलिंग के 1,000 किलोमीटर से ज्यादा की डीप-स्ट्राइक मिशन पर उड़ सकता है और आफ्टरबर्नर के साथ Mach 1.8 (1,381 mph) की स्पीड से क्रूज कर सकता है। अमेरिका, भारत को F-35 लाइटनिंग II स्टील्थ, पांचवीं पीढ़ी के मल्टीरोल फाइटर देने की डील करके उसे लुभाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन अब अमेरिका को मना कर दिया गया है। इसीलिए बहुत उम्मीद है कि फ्रांस के साथ राफेल फाइटर जेट के लिए डील हो जाए।













