• International
  • ग्रीनलैंड में क्रैश हो गया था अमेरिकी B-52 परमाणु बॉम्बर, 58 साल से गायब है न्यूक्लियर हथियार, कितना खतरा?

    वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी दे रहे हैं। ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है। शुक्रवार को तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक में ट्रंप ने कहा कि हम ग्रीनलैंड में कुछ करने जा रहे हैं, वरना रूस और चीन


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 11, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी दे रहे हैं। ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है। शुक्रवार को तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक में ट्रंप ने कहा कि हम ग्रीनलैंड में कुछ करने जा रहे हैं, वरना रूस और चीन वहां अपना कब्जा जमा लेंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमेरिकी सेना सात दशक से ज्यादा समय से ग्रीनलैंड में मौजूद है। एक समय तो इस द्वीप पर चार सैन्य अड्डे थे, जिनमें लड़ाकू विमान, रणनीतिक बॉम्बर, मिसाइल डिफेंस सिस्टम और यहां तक कि न्यूक्लियर बम भी थे। ये वो समय था जब अमेरिका ग्रीनलैंड में सीक्रेट तरीके से न्यूक्लियर ऑपरेशन चला रहा था।

    डेनमार्क ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से ही नीति अपनाई थी कि वह शांति के समय अपनी जमीन पर परमाणु हथियार रखने की इजाजत नहीं देगा। हालांकि, पर्दे के पीछे डेनमार्क के चुपचाप अमेरिका को ग्रीनलैंड में अपने अपने परमाणु हथियार रखने की इजाजत दे दी। इसी दौर में जब शीत युद्ध चरम पर था, अमेरिका की वायु सेना का B-52G स्ट्रैटोफोर्टेस बॉम्बर ग्रीनलैंड के उत्तर-पश्चिमी कोने में समुद्री बर्फ पर क्रैश हो गया। सबसे खतरनाक बात तो यह थी कि इस बमवर्षक में चार परमाणु बम रखे हुए थे।

    आज भी गायब है न्यूक्लियर वॉरहेड

    इस क्रैश की वजह से ग्रीनलैंड में रेडियोएक्टिव लीक हुआ और बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया। हालांकि, कई एक्सपर्ट्स का दावा है कि इस हादसे का एक न्यूक्लियर वॉरहेड अभी भी ग्रीनलैंड की बर्फीली चादरों के पीछे कहीं मौजूद है। लेकिन अमेरिकी न्यूक्लियर हथियार ग्रीनलैंड तक पहुंचे कैसे, इसकी कहानी दिलचस्प है।

    आर्कटिक में स्थित ग्रीनलैंड अमेरिकी सेना के लिए रणनीतिक रूप से बहुत अहम है। अमेरिका ने कई बार इसे हासिल करने की कोशिश की है। 1951 में अमेरिका और डेनमार्क के बीच समझौता हुआ, जिससे वॉशिंगटन को ग्रीनलैंड के इलाके और एयरस्पेस तक पूरी पहुंच मिल गई। इसके बाद 1955 में अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा, अमेरिका ग्रीनलैंड में जो करना चाहते हैं, कर सकता है।

    अमेरिका ने ग्रीनलैंड में रखे परमाणु हथियार

    इसके पहले अमेरिका ने 1953 में ग्रीनलैंड के उत्तरी-पश्चिमी इलाके में थुले मिलिट्री बेस का निर्माण शुरू किया। 1957 में ग्रीनलैंड ने चुपके से अमेरिका को थुले एयरबेस पर परमाणु हथियार रखने की इजाजत दे दी। यह गुप्ता समझौता परमाणु हथियारों पर डेनमार्क की आधिकारिक स्थिति का उल्लंघन था। 1958 में अमेरिका की स्ट्रेटेजिक एयर कमांड ने परमाणु बम की तैनाती की।

    1958 से 1965 अमेरिका ने थुले में 48 परमाणु हथियार रखे। लेकिन इससे भी खतरनाक बात अमेरिकी परमाणु हथियारों से लैस उड़ाने थीं। 1950 से 1960 के दशक के दौरान अमेरिकी बमवर्षक विमान परमाणु बम से लैस होकर लगातार उड़ान भर रहे थे। इसका एक कारण सोवियत संघ के अचानक हमले का डर था। यह हमला अमेरिकी स्ट्रेटेजिक फोर्स के बड़े हिस्से को हवा में उड़ने से पहले ही जमीन पर नष्ट करने में सक्षम होता।

    चार परमाणु बम के साथ क्रैश हुआ विमान

    ऐसी ही एक उड़ान के दौरान 21 जनवरी 1968 को अमेरिकी स्ट्रेटेजिक फोर्स का एक B-52G स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बॉम्बर ग्रीनलैंड के उत्तरी-पश्चिमी कोने में क्रैश हो गया। चार परमाणु बम से लैस बॉम्बर, इंसानी गलती के कारण क्रैश हुआ था। विमान के हीटिंग वेंट में आग लग गई थी। क्रू ने आग बुझाने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहा। कॉकपिट धुएं से भर गया। इमरजेंसी लैंडिंग का वक्त नहीं था। ऐसे में क्रू ने इजेक्ट करने का फैसला किया। सात में से छह क्रू पैराशूट से बाहर निकल गए लेकिन एक की क्रैश में मौत हो गई।

    क्रैश के चलते हथियार टूट गए और रेडियोएक्टिव पदार्थ बाहर निकल गए। हालांकि, कोई न्यूक्लियर धमाका नहीं हुआ, लेकिन रेडियोएक्टिव प्लूटोनियम कई मील तक बर्फ के मैदानों में फैल गया। इसने पर्यावरणीय संकट पैदा कर दिया। इस घटना के बाद अमेरिका ने ग्रीनलैंड के ऊपर न्यूक्लियर उड़ानें रोक दीं। अमेरिका पहले न्यूक्लियर मलबे को हटाना नहीं चाहता था, लेकिन डेनमार्क के दबाव के चलते मानना पड़ा। लेकिन कहा जाता है कि एक परमाणु हथियार को खोजा नहीं जा सका।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।