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  • अमेरिका ने H-1B वीजा के लिए बढ़ा दी प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस, भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर, जानें रेट

    वॉशिंगटन: भारतीयों में सबसे ज्यादा डिमांड वाला अमेरिका का H-1B वीजा अब महंगा होने वाला है। अमेरिकी सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) ने एच-1बी वीजा समेत कई इमिग्रेशन सुविधाओं के लिए फीस बढ़ाने की घोषणा की है। यह बढ़ोतरी इसी साल 1 मार्च से लागू होगी। फीस बढ़ोतरी से विदेशी अप्रवासियों को दिए जाने वाले


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    By Azad Hind Desk जनवरी 11, 2026
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    वॉशिंगटन: भारतीयों में सबसे ज्यादा डिमांड वाला अमेरिका का H-1B वीजा अब महंगा होने वाला है। अमेरिकी सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) ने एच-1बी वीजा समेत कई इमिग्रेशन सुविधाओं के लिए फीस बढ़ाने की घोषणा की है। यह बढ़ोतरी इसी साल 1 मार्च से लागू होगी। फीस बढ़ोतरी से विदेशी अप्रवासियों को दिए जाने वाले रोजगार-आधारित और नॉन-इमिग्रेंट आवेदनों की एक बड़ी रेंज प्रभावित होगी। इसमें अमेरिका में बड़ी संख्या में काम करने वाले या पढ़ाई करने वाले भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इमिग्रेशन विभाग ने कहा है कि प्रोसेसिंग फीस जून 2023 से जून 2025 तक महंगाई को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

    जानें किसकी कितनी बढ़ी फीस?

    USCIS से जारी नए फीस शेड्यूल के अनुसार H-1B या R-1 नॉन-इमिग्रेंट दर्जे के लिए फॉर्म I-129 आवेदन की प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस 1685 डॉलर से बढ़कर 1780 डॉलर हो जाएगी। इसके अलावा H-1B,L-1, O-1, P-1 और TN वीजा के लिए प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस 2805 डॉलर से बढ़कर 2965 हो जाएगी। I-140 आवेदन के लिए फीस को 2805 से 2965 कर दिया गया।

    फॉर्म I-539 आवेदन की फीस 1965 से 2075 डॉलर कर दी गई है। इस श्रेणी में F-1 और F-2 छात्र, J-1 और J-2 एक्सचेंज विजिटर और M-1 व M-2 वोकेशनल छात्र शामिल हैं। जल्दी एम्प्लॉयमेंट ऑथराइजेशन चाहने वाले आवेदकों के लिए फीस को 1685 से 1780 कर दिया गया है।

    USCIS ने जोर देकर कहा कि बढ़ी हुई कमाई का इस्तेमाल एजेंसी के ऑपरेशंस को सपोर्ट करने के लिए किया जाएगा। इसमें प्रीमियम प्रोसेसिंग सेवाएं देने, प्रोसेसिंग बैकलॉग को साफ करने और UCSCIS की न्याय और नेचुरलाइजेशन सेवाओं को फंड देने के लिए किया जाएगा।

    भारतीयों पर क्या होगा असर?

    भारतीय नागरिक H-1B अमेरिका के H-1B कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थी हैं। रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड बैकलॉग में उनका बड़ा हिस्सा है। ऐसे में फीस बढ़ोतरी से कई भारतीय प्रोफेशनल्स, छात्र और एम्प्लॉयर्स पर असर पड़ने की संभावना है। हालांकि,प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस पूरी तरह से वैकल्पिक है। इसके इस्तेमाल मुख्य रूप से ऐसे आवेदक करते हैं, जो नौकरी बदलने, वीजा विस्तार, ट्रैवेल प्लान जैसे मामलों में जल्दी फैसला चाहते हैं।

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