• National
  • टकटकी लगाकर भारत की ओर देख रही पूरी दुनिया, क्या है 2026 का ISRO का पहला लॉन्च PSLV-C62?

    नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) नए साल की शुरुआत भारत के अंतरिक्ष कैलेंडर में PSLV-C62 मिशन के साथ करने जा रहा है। यह मिशन सोमवार यानी 12 जनवरी को सुबह 10:18 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्च पैड से उड़ान भरेगा। ISRO ने बताया है कि लॉन्च व्हीकल और सैटेलाइट को


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 11, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) नए साल की शुरुआत भारत के अंतरिक्ष कैलेंडर में PSLV-C62 मिशन के साथ करने जा रहा है। यह मिशन सोमवार यानी 12 जनवरी को सुबह 10:18 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्च पैड से उड़ान भरेगा। ISRO ने बताया है कि लॉन्च व्हीकल और सैटेलाइट को एक साथ जोड़ दिया गया है और अब लॉन्च से पहले की जांच चल रही है। पिछले दो दशकों से, पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) भारत की लॉन्चिंग क्षमताओं का मुख्य आधार बना हुआ है।

    PSLV-C62 / EOS-N1 मिशन क्या है?

    PSLV-C62, पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल का 64वां मिशन होगा। यह न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) की ओर से किया जाने वाला नौवां पूरी तरह से कमर्शियल मिशन है। इस मिशन का मुख्य काम एक यूजर के लिए EOS-N1 नाम का अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट बनाना और लॉन्च करना है। इसके अलावा, इस लॉन्च में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों के 15 छोटे सैटेलाइट भी भेजे जाएंगे। NSIL सैटेलाइट को जोड़ने से लेकर मिशन को पूरा करने तक, लॉन्च से जुड़ी सारी सेवाएं देगा।

    यह मिशन PSLV-DL कॉन्फिगरेशन का इस्तेमाल करेगा। इसमें लॉन्च की क्षमता बढ़ाने के लिए दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन मोटर लगे होंगे। इस तरह के PSLV को तब चुना जाता है जब मिशन को ज्यादा ताकत की जरूरत होती है, लेकिन साथ ही PSLV की भरोसेमंदता और सटीकता भी बनी रहनी चाहिए।

    EOS-N1 क्या है और इसका क्या काम होगा?

    EOS-N1 एक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है। इसे पृथ्वी पर नजर रखने की हमारी क्षमता को और मजबूत करने के लिए बनाया गया है। EOS सीरीज के सैटेलाइट आमतौर पर पर्यावरण की निगरानी, संसाधनों का नक्शा बनाने, आपदा प्रबंधन में मदद करने और योजना बनाने जैसे कामों के लिए इस्तेमाल होते हैं। मुख्य सैटेलाइट के साथ, PSLV-C62 मिशन एक टेक्नोलॉजी डेमो भी ले जाएगा।

    • इस मिशन का एक खास दूसरा मकसद स्पेन की एक स्टार्टअप कंपनी की ओर से विकसित Kestrel Initial Technology Demonstrator (KID) का प्रदर्शन करना है। KID एक छोटे आकार का री-एंट्री व्हीकल (अंतरिक्ष से वापस आने वाले यान) का प्रोटोटाइप है।
    • यह मिशन में भेजे जाने वाले आखिरी को-पैसेंजर सैटेलाइट में से एक होगा। अंतरिक्ष में अपना काम पूरा करने के बाद, यह पृथ्वी के वायुमंडल में वापस आएगा और दक्षिण प्रशांत महासागर में गिरेगा। इससे भविष्य में री-एंट्री सिस्टम को विकसित करने के लिए जरूरी डेटा मिलेगा।
    • PSLV, ISRO का सबसे भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल है। इसने अब तक 63 मिशन पूरे किए हैं। इनमें चंद्रयान-1, मार्स ऑर्बिटर मिशन, आदित्य-एल1 और एस्ट्रोसैट जैसे बड़े मिशन शामिल हैं। 2017 में, PSLV ने एक ही मिशन में 104 सैटेलाइट लॉन्च करके विश्व रिकॉर्ड बनाया था।
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।