सीसीटीवी के मुताबिक ये युद्धाभ्यास मध्य चीन के हेनान प्रांत के शुचांग में आयोजित की गई थी। इस दौरान चीनी थल सेना की कम से कम 20 यूनिट ने हिस्सा लिया हुआ था। दो एयर फोर्स अधिकारियों के पीछे एक बोर्ड था जिस पर आठ J-16 और राफेल लड़ाकू विमान के बीच हवाई युद्ध का एक सीन दिखाया गया था। इस दौरान एक अधिकारी बोर्ड पर और खतरों की तरफ इशारा कर रहा था। हालांकि युद्ध की ये प्रकृति साफ नहीं थी, लेकिन इससे पता चलता है कि राफेल दूसरे एसेट्स के साथ एक नेटवर्क के हिस्से के तौर पर काम कर रहे होंगे।
राफेल फाइटर जेट से क्यों दहशत में है चीन?
डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि J-16 और राफेल को शायद वॉरगेम को आसान बनाने के लिए चुना गया होगा। इसका मकसद कई यूनिट्स में वॉरगेमिंग तकनीक सिखाने के लिए किया जा सके। J-16, जिसे J-15B के साथ चीनी सेना का चौथी पीढ़ी के फाइटर जेट माना जाता है, उसे चीनी एयरफोर्स के नए J-20 और J-35 पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स की तुलना में इसकी क्षमताओं को सिमुलेट करना काफी आसान और कम जटिल है। हालांकि चीन को सिर्फ राफेल से ही नहीं, बल्कि अमेरिकी F-35 स्टील्थ फाइटक जेट का भी काफी डर है, जिसे ज्यादातर नाटो देशों के अलावा जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भी इस्तेमाल करते हैं। J-20 और J-35 की तरह, वॉरगेम में F-35 की क्षमताओं को सिमुलेट करना काफी ज्यादा मुश्किल था। अमेरिकी वायु सेना भी ताइवान जलडमरूमध्य के पास ओकिनावा में F-15EX चौथी पीढ़ी के फाइटर जेट्स को स्थायी रूप से तैनात कर दिया है, जिसे भी चीन अपने लिए चुनौती मानता है।
आपको बता दें कि भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल 36 राफेल फाइटर हैं, जबकि ऐसी रिपोर्ट है कि भारत, फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट और खरीद सकता है। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल से ही पाकिस्तान और पीओके स्थिति आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। राफेल ने पाकिस्तान और पीओके स्थिति 9 आतंकी ठिकानों को पूरी तरह से तबाह कर दिया था। भारतीय वायुसेना ने पिछले साल के अंत में भारत सरकार से 114 फ्रांसीसी राफेल खरीदने के लिए प्रस्ताव भेजा था। वहीं इस साल की शुरूआत में आई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि भारत और फ्रांस के बीच ‘सरकार से सरकार’ स्तर के जरिए दोनों राफेल फाइटर जेट डील हो सकती है।












