ज्योतिष शास्त्र में वर्णित है, शनि कर्म और अनुशासन के प्रतीक हैं, अतः मकर संक्रांति पर्व कर्म सुधार और जीवन-दिशा परिवर्तन का संकेत है। जब कोई व्यक्ति ग्रहों की पीड़ा से परेशान होकर ज्योतिषी के पास जाता है, तो ज्योतिषी उसे उसके भाग्योदय के लिए कुछ उपाय बताते हैं। इन उपायों में रत्न धारण, मंत्र जप, औषधि स्नान, दान आदि के साथ कर्म सुधार करने की प्रेरणा भी होती है। जब व्यक्ति दान आदि पुण्य कर्म करना प्रारम्भ कर देता है, तो अपने आप धीरे-धीरे उस पर आया हुआ ग्रह का प्रकोप शांत होने लगता है। यही कारण है कि शास्त्रों में मकर संक्रांति पर स्नान-दान को विशेष फलदायी बताया गया है।
केवल शनि ही नहीं सूर्य सहित सभी ग्रहों का उपाय मकर संक्रांति के शुभ संचरण काल में किया जाता है। मकर संक्रांति लगते ही देवताओं का दिन और दैत्यों की रात्रि हो जाती है, इसलिए मांगलिक कार्यों का सिलसिला भी प्रारम्भ हो जाता है। इस बार तीर्थों के राज प्रयागराज में मकर संक्रांति के बाद माघ मास कृष्ण पक्ष की अमावस्या यानि मौनी अमावस्या भी ग्रह शांति के लिए विशेष है। सम्पूर्ण माघ के माह में मौनी अमावस्या अतिविशिष्ट पर्व है। अमावस्या तिथि पितरों के साथ शनि शांति के लिए उपयुक्त है, अतः मकर संक्रांति और फिर मौनी अमावस्या, इन दोनों पर्वों के दिन अगर तेल में चेहरा देखकर छाया दान किया जाए तो ग्रह कष्टों का सरलतापूर्वक शमन होता है। काले तिल का दान अथवा काले तिल से लड्डू बनाकर मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या के दिन दान करने से जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन दिखाई पड़ता है।













