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  • Magh Shivratri Vrat 2026 Date : माघ मास शिवरात्रि कब है, इस दिन शिव व्रत से मिलती है नरक जाने से मुक्ति

    माघ मास में आने वाली शिवरात्रि को विशेष महत्व बताया गया है। माघ मास में आने वाली शिवरात्रि का व्रत बहुत ही शुभ माना जाता है। यह साल 2026 की पहली शिवरात्रि भी है। मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन व्रत करके भगवान शिव का उपासना करने वाले व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी होती है। साथ


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    By Azad Hind Desk जनवरी 12, 2026
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    माघ मास में आने वाली शिवरात्रि को विशेष महत्व बताया गया है। माघ मास में आने वाली शिवरात्रि का व्रत बहुत ही शुभ माना जाता है। यह साल 2026 की पहली शिवरात्रि भी है। मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन व्रत करके भगवान शिव का उपासना करने वाले व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी होती है। साथ ही व्यक्ति को धन, धान्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है। माघ मास की शिवरात्रि का व्रत करने वालों को नरक जाने से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं माघ मास शिवरात्रि का व्रत कब रखा जाएगा। जानें महत्व, पूजा विधि और व्रत की सही तारीख।

    माघ शिवरात्रि व्रत 2026 कब है ?
    शिवरात्रि का व्रत चतुर्दशी तिथि को रखा जाएगा। चतुर्दशी तिथि का आरंभ 16 जनवरी को रात में 10 बजकर 2 मिनट पर होगी और 17 तारीख को रात में 12 बजकर 4 मिनट पर चतुर्दशी तिथि समाप्त होगी। ऐसे में माघ मास की चतुर्दशी तिथि का व्रत 17 जनवरी को रखा जाएगा। जबकि जो लोग मासिक प्रदोष व्रत करेंगे उन्हें 16 जनवरी को प्रदोष व्रत रखना है क्योंकि, इस दिन प्रदोष काल में त्रयोदशी रहेगी। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति माघ मास की चतुर्दशी तिथि का व्रत रखते हैं उन्हें नरक जाने से मुक्ति मिलती है। माघ मास की शिवरात्रि में सेम और बेर का बड़ा महत्व है। इस दिन भगवान शिव को सेम और बेर अर्पित करना चाहिए। साथ ही भगवान शिव को अर्पित किया जाता है और इसी से पारण भी किया जाता है।

    मासिक शिवरात्रि का महत्व

    शास्त्रों के अनुसार, माघ मास की शिवरात्रि का व्रत करने वालों को पाप, कष्ट, रोग, दोष मिटते हैं। इस व्रत को करने वालों को आशीर्वाद की प्राप्ति होती है और उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

    माघ मास शिवरात्रि पूजी विधि

    1) चतुर्दशी तिथि पर सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
    2) इसके बाद भगवान शिव के मंदिर में जाकर घी का दीपक जलाएं और फिर व्रत का संकल्प लें।
    3) इसके बाद व्रत आरंभ करें। पूरे दिन उपवास रखकर प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करें।
    4) शाम के समय मंदिर में जाएं फिर भगवान शिव के सामने घी का दीपक जलाएं और भगवान शिव के मंत्र का जप करें।
    5) इसके बाद मासिक शिवरात्रि व्रत कथा का पाठ करें।
    6) अंत में भगवान शिव की आरती करें और उन्हें भोग लगाएं। इसके बाद व्रत का पारण करें।

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