बुढ़ापे और समाज सेवा के लिए जो पैसा बचाया था, उसे साइबर ठग ले उड़े। वो भी पूरे 14.5 करोड़ रुपये। बुजुर्ग दंपति को 1-2 दिन नहीं बल्कि 17 दिन देश की राजधानी दिल्ली में ही डिजिटल अरेस्ट करके रखा गया। डरा-धमका कर 24 घंटे कैमरे की निगरानी में रहने को मजबूर किया गया। बैंक खाते से लगातार पैसा निकाला गया। ठगों ने जाल बिछाया और सीधे-साधे बुजुर्ग इसमें फंस गए। आखिर कैसे पढ़े-लिखे शख्स इस जाल में फंस गए? क्या-क्या हुआ उन 17 दिनों में आइए, ग्रेटर कैलाश में रहने वाली इस दंपति ने विस्तार से बताया..
एक कॉल से शुरू हुआ ठगी का गंदा खेल
बुजुर्ग कपल को 24 दिसंबर से 9 जनवरी के बीच डिजिटल अरेस्ट करके रखा गया। यह सब बाकी साइबर ठगी की तरह एक फोन कॉल से शुरू हुआ। अधिकारी बन शख्स ने कहा कि आपके खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री सर्कुलेट करने और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने की 20 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुई हैं। ठगों ने डराया कि उनकी गिरफ्तारी तय है। इंदिरा तनेजा के अनुसार वे लगातार कहते रहे कि उन्होंने कुछ नहीं किया। ठगों ने खुद को मुंबई के कोलाबा थाने में तैनात बताया। इंदिरा को एक उद्योगपति की फोटो दिखाई गई और कहा गया कि आप इनके साथ 500 करोड़ के फ्रॉड में शामिल हैं। बताया गया कि बैंक खाता खोलने के लिए आपके ही अंगूठे के निशान का उपयोग किया गया। इंदिरा ने Azad Hind को बताया कि हमें तुरंत मुंबई आने का आदेश दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाने का झांसा
जब इंदिरा ने बताया कि उनके पति की तबीयत खराब है और हाल ही में उनकी सर्जरी हुई है। तो साइबर ठगों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को एक लेटर लिखो और बताओ कि आप यात्रा करने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने दंपति के बच्चों के बारे में भी पूछा, जो अमेरिका में रहते हैं। ठग वीडियो कॉल पर बार-बार SSA शब्द का प्रयोग कर रहे थे। तनेजा दंपति से फिर अपने अकाउंट की सारी जानकारी साझा करने को कहा गया। साथ में धमकी दी कि अगर ऐसा नहीं करोगे तो खाते फ्रीज कर दिए जाएंगे। ठगों ने भरोसा दिलाया कि वेरिफिकेशन के बाद सारा पैसा लौटा दिया जाएगा।
बेडरूम से फोन तक ले जाने नहीं दिया
साइबर ठगों ने बुजुर्ग दंपति को उन्हीं के बेडरूम में बंदी बनाकर रख लिया। यहां तक कि एक मिनट के लिए फोन बाहर ले जाने नहीं दिया गया। डॉक्टर इंदिरा तनेजा ने बताया कि कैमरे के दूसरी तरफ बैठे ठग हमेशा म्यूट पर ही रहते, लेकिन जैसे ही आप उठते वो तुरंत सवाल पूछते। वो हर पल हम पर नजर बनाए रखे हुए थे। यहां तक कि जब हमें अपने बच्चों से बात करने दिया जाता तब भी मेरे पति ओम के फोन से वो हमारी सारी बातें सुनते।
फर्जी थाना ही नहीं फर्जी अदालत भी
साइबर ठगों ने फर्जी थाना ही नहीं फर्जी अदालत भी खड़ी कर डाली। कोर्टरूम ड्रामा क्रिएट करने के लिए उन्होंने एक शख्स को जज भी बनाकर बैठा दिया। इंदिरा ने बताया कि मेरा एक वकील दोस्त मुझे लेकर चिंतित हो रहा था, लेकिन जब उसने मुझे पूछा तो मैंने यह कहकर टाल दिया कि वह अपने NGO के काम में बिजी है। हमसे बार-बार पैसा ट्रांसफर कराया गया। यही नहीं इस बात की भी ट्रेनिंग दी गई कि अगर बैंककर्मी पूछताछ करते हैं तो क्या कहना है।
डॉक्टर इंदिरा ने आगे बताया कि 9 जनवरी को मुझसे कहा गया कि तुम्हारा नाम शिकायत से हटा दिया गया है, लेकिन आपके पति का नाम अभी भी दर्ज शिकायत में है। तब तक वे हमसे 14 करोड़ ले चुके थे और इस बार फिर से 50 लाख की डिमांड की। इसके बाद अचानक से वीडियो कॉल का कनेक्शन ऑफ हो गया। लेकिन 10 जनवरी को फिर से कॉल आया। इस बार ठगों ने कहा कि दोनों का नाम शिकायत से हटा दिया गया है और उन्हें नजदीक के पुलिस स्टेशन जाना होगा। जब वे पुलिस स्टेशन पहुंचे तब उन्हें पता चला कि उनके साथ कितना बड़ा फ्रॉड हो गया।














