पीएमओ का नया पता ‘सेवा तीर्थ’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी हफ्ते रायसीना हिल्स के पास से अपने नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ-1’से काम शुरू कर सकते हैं। यह परिसर सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा है। अभी पीएमओ साउथ ब्लॉक में है। ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में पीएमओ (सेवा तीर्थ-1) के अलावा कैबिनेट सचिवालय (सेवा तीर्थ-2) और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरियट (सेवा तीर्थ-3) भी होगा, जिसके लिए अलग-अलग इमारतें बनी हैं। कैबिनेट सचिवालय पिछले साल सितंबर में ही ‘सेवा तीर्थ-2’ में शिफ्ट हो चुकी है।
1,189 करोड़ में बना ‘सेवा तीर्थ’
1947 में देश की आजादी के समय से ही प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से चल रहा है, जो भारत की सत्ता का केंद्र रहा है। पूरे ‘सेवा तीर्थ’ परिसर पर करीब 1,189 करोड़ रुपये की लागत आई है, जिसे लार्सन एंड टुब्रो ने बनाया है। ‘सेवा तीर्थ’ परिसर को ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव-1’ के नाम से भी जाना जाता है। यह पूरा परिसर 2,26,203 वर्ग फीट में फैला है।
औपनिवेशिक विरासत से छुटकारा
‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव-1’ के पास में ही ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव-2’ का भी निर्माण हो रहा है, जहां ‘सात लोक कल्याण मार्ग’ (7 LKM) से प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास शिफ्ट होने वाला है। पीएम मोदी देश को औपनिवेशिक विरासत से छुटकारा दिलाने के विजन के साथ काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में सात रेस कोर्स रोड(7 RCR) का नाम ‘सात लोक कल्याण मार्ग’ किया जा चुका है। इसी तरह से राजपथ का नाम भी बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ किया जा चुका है।
‘ युग युगीन भारत संग्रहालय ‘ क्या है
इसके अलावा नए कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरियट (CCS) इमारतों के निर्माण पर भी काम चल रहा है, जहां केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों का दफ्तर शिफ्ट होने वाला है। इन्हीं में से ‘कर्तव्य भवन-3’ का पिछले साल अगस्त में उद्घाटन को चुका है, जहां गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय समेत कई और मंत्रालय शिफ्ट भी हो चुके हैं। वहीं ब्रिटिश काल के साउथ और नॉर्थ ब्लॉक के पूरी तरह से खाली होने पर यह पूरी तरह से ‘युग युगीन भारत संग्रहालय’ में बदल जाएंगे,जहां भारत की 5,000 साल पुरानी विरासत को समेटा जा रहा है। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के मुताबिक, ‘यह संग्रहालय भारत की समृद्ध धरोहर और प्रगति की अटूट भावना का एक प्रमाण होगा।’













