दिल्ली की बुजुर्ग दंपति ने ऐसी कई गलतियां कीं, जिससे वे जाल में फंसकर अपनी जीवन भर की पूंजी लुटा बैठे। पूरे 17 दिन तक वो डर के साये में रहते हुए डिजिटल अरेस्ट रहे। ठग जो कुछ कहते गए, वो करते चले गए। कहते हैं इंसान गलतियों से सीखता है, तो बेहतर यही होगा कि आप इससे सीखें कि आपको क्या नहीं करना है? डॉक्टर ओम तनेजा और डॉक्टर इंदिरा तनेजा के साथ जो कुछ हुआ, उससे हम काफी कुछ सबक ले सकते हैं।
डरने से पहले जान लें क्या कहती है पुलिस
100 बातों की 1 बात, डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज है ही नहीं। केंद्रीय एजेंसी हो या स्टेट एजेंसी, कभी भी कोई फोन या वीडियो कॉल पर किसी मामले की जांच नहीं करता है। अगर जांच एजेंसियों को कुछ गड़बड़ का शक होगा तो या आपको संबंधित ऑफिस बुलाया जाएगा और आमने-सामने पूछताछ की जाएगी। कोई वीडियो कॉल नहीं आएगी। इसलिए अगर कभी भी आपके पास कोई वीडियो कॉल आती है तो उसे तुरंत काट दें और शिकायत दर्ज कराएं।
चाहे कुछ हो जाए भूलकर न करें ये 5 चीजें
- एक चीज गांठ बांध लें, बैंक की जानकारी या OTP कभी भी किसी के साथ फोन या ईमेल पर कभी भी साझा न करें।
- अगर कभी आपके पास ऐसे कॉल आते हैं तो घबराएं नहीं। न ही डर के मारे फोन पर मिलने वाले सारे आदेश मानें।
- ये बात हमेशा याद रखें कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर पैसा या खाते की जानकारी नहीं मांगती है।
- अगर कोई कॉलर आपको संदिग्ध लग रहा है तो उसके साथ लंबे समय तक बात न करें।
- अगर कोई फोन कॉल आपको संदिग्ध लग रही है तो उसे काटने में हिचकिचाएं नहीं। याद रखिए सरकारी एजेंसी आपको फोन नहीं डराती है।
कोई कॉल आए तो सबसे पहले करें ये काम
- कॉल पर खुद को सरकारी अधिकारी बताता है तो घबराने के बजाय अच्छे से वेरिफिकेशन कर लें। इसके लिए संबंधित सरकारी दफ्तर में कॉल कर लें
- शांत रहें और संयम बनाए रखें क्योंकि साइबर ठगों का सबसे बड़ा हथियार आपका डर है। बस इसे हावी न होने दें।
- अगर आपके पास कोई संदिग्ध कॉल आती है तो तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन में कॉल करें या साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
- साइबर क्राइम की वेबसाइट cybercrime.gov.in पर जाकर भी आप शिकायत कर सकते हैं।













