DRDO की हैदराबाद स्थित डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) ने रविवार को महाराष्ट्र के अहिल्या नगर में केके रेंज में एक चलते-फिरते लक्ष्य पर तीसरी पीढ़ी की मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलका सफल परीक्षण किया। यह मिसाइल खास तौर पर ऊपर से हमला करने की क्षमता रखती है और इसे स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
क्या है खासियत?
- यह मिसाइल कई आधुनिक तकनीकों से लैस है। इसमें खास तरह का इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) होमिंग सीकर लगा है, जो लक्ष्य को पहचानता है। यह सीकर मिसाइल को अपने लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाने में मदद करता है।
- इसके अलावा, इसमें पूरी तरह से इलेक्ट्रिक कंट्रोल एक्चुएशन सिस्टम है, जो मिसाइल की दिशा और गति को नियंत्रित करता है।
- इस मिसाइल में एक फायर कंट्रोल सिस्टम भी है, जो मिसाइल को लॉन्च करने से पहले लक्ष्य को लॉक करने में मदद करता है। टैंडम वारहेड दुश्मन के कवच को भेदने में माहिर है, जिससे यह टैंकों के लिए एक बड़ा खतरा बन जाती है।
- प्रोपल्शन सिस्टम मिसाइल को उड़ान भरने के लिए शक्ति प्रदान करता है। एक हाई-परफॉरमेंस साइटिंग सिस्टम भी इसमें शामिल है, जो सैनिकों को लक्ष्य को आसानी से पहचानने और निशाना लगाने में मदद करता है।
इन सभी एडवांस्ड तकनीकों को DRDO की ही दूसरी प्रयोगशालाओं ने विकसित किया है। इनमें हैदराबाद की रिसर्च सेंटर इमेरेट (RCI), चंडीगढ़ की टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL), पुणे की हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (HEMRL) और देहरादून की इंस्ट्रूमेंट्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (IRDE) शामिल हैं।














