ट्रेंट और लार्सन एंड टुब्रो में तीन फीसदी से अधिक गिरावट रही जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर एक फीसदी से अधिक फिसला। दिन की शुरुआत उम्मीदों के साथ हुई थी। अमेरिका के ट्रेड डील को लेकर उम्मीदों और आईटी कंपनियों टीसीएस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज की शुरुआती अच्छी कमाई ने शुरुआत में बाजार का मूड अच्छा कर दिया था। लेकिन यह राहत भरी तेजी ज़्यादा देर तक नहीं टिक पाई। दोपहर के बाद के सत्र में बाजार में तेज गिरावट आई। मंगलवार को बाजार में गिरावट के मुख्य कारण क्या थे?
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1. बड़ी कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली
बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव फिर से लौट आया, जिससे बाजार नीचे आ गया। देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 2% गिर गए जबकि पिछले दिन इसमें 0.5% की तेजी आई थी। पिछले हफ्ते ही 7.4% गिर चुका था, क्योंकि कंपनी ने कहा था कि उसे जनवरी में रूस से कच्चा तेल नहीं मिलेगा। इससे निवेशक सतर्क हो गए थे। IT सेक्टर भी बाजार को नीचे खींचने में पीछे नहीं रहा। इस सेक्टर का इंडेक्स 0.4% गिर गया। एचसीएल टेक के शेयर 2% गिरे, जबकि टीसीएस के शेयर 0.1% नीचे आए।
2. कच्चे तेल का असर
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें घरेलू शेयर बाजार पर एक और दबाव का कारण बनीं। भारत कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक है। ईरान में चल रहे तनाव के कारण तेल बाजार में तेजी आई, जिससे आपूर्ति बाधित होने का डर बढ़ गया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर 25% का टैरिफ लगाया जाएगा। इससे भू-राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ गई। ब्रेंट क्रूड 57 सेंट यानी 0.9% बढ़कर $64.44 प्रति बैरल हो गया, जो दो महीने के उच्चतम स्तर के करीब है।
3. एफआईआई की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बनाए हुए है। इससे गिरावट और बढ़ गई है। सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार ने 3,638 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी ने प्रमुख शेयर सूचकांकों पर दबाव डाला है, जिससे वैश्विक अनिश्चितता के बीच नुकसान बढ़ गया है और निवेशकों की सतर्कता और बढ़ गई है।
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4. रुपये का कमजोर होना
भारतीय रुपये में गिरावट भी निवेशकों के भरोसे को और कम कर रही है। इससे गिरते शेयरों के दबाव में और इजाफा हुआ है। मंगलवार को भी रुपया कमजोर हुआ। इसका मुख्य कारण शेयर बाजार का ठंडा प्रदर्शन और भारतीय बॉन्ड के एक प्रमुख वैश्विक इंडेक्स में शामिल होने में देरी थी। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हस्तक्षेप से रुपये की गिरावट को कुछ हद तक रोका गया।
5. तकनीकी संकेत
तकनीकी संकेत बता रहे है कि बाजार निचले स्तरों से वापसी की कोशिश कर रहा था, लेकिन कुल मिलाकर बाजार की चाल कमजोर बनी हुई थी, जिससे ट्रेडर्स सतर्क थे। विश्लेषकों ने कुछ महत्वपूर्ण सपोर्ट (सहारा) और रेजिस्टेंस (बाधा) स्तरों की ओर इशारा किया, जो बढ़ी हुई अस्थिरता के बीच बाजार की छोटी अवधि की दिशा तय कर रहे थे।












