News18 को दिए एक इंटरव्यू में शेख हसीना ने बताया कि बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक पहचान को व्यवस्थित तरीके से खत्म किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यूनुस सरकार में जमात-ए-इस्लामी और सहयोगी चरमपंथी समूहों को राजनीतिक सुरक्षा और छूट मिली हुई है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा वैकल्पिक नहीं थी, बल्कि एक संवैधानिक दायित्व और नैतिक कर्तव्य था। हसीना ने पत्रकारों को गिरफ्तार करके असहमति को दबाने के लिए यूनुस सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकारों को बेबुनियाद आरोपों में गिरफ्तार किया जा रहा है।
दीपू चंद्र दास की हत्या को बताया शर्मनाक अपराध
शेख हसीना ने कहा कि दीपू चंद्र दास की हत्या एक भयानक और शर्मनाक अपराध था। यह आज बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के सामने गंभीर खतरे को दिखाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अगस्त 2024 से हमने हिंदुओं, बौद्धों, ईसाइयों, अहमदी मुसलमानों और स्वदेशी समुदायों के खिलाफ हिंसा का एक लगातार चक्र देखा है। ऐसी हिंसा जिसे इनकार, निष्क्रियता और पूरी छूट के माध्यम से बिना रोक-टोक फैलने दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि यह मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार के आतंक के राज का लक्षण है।
उस्मान हादी की हत्या पर भी बोलीं हसीना
उस्मान हादी की हत्या पर शेख हसीना ने दुख जताया। उन्होंने कहा कि उस्मान हादी की हत्या एक दुखद और भयानक घटना थी, जिसके लिए सरकार की ओर से उचित, निष्पक्ष प्रतिक्रिया मिलनी चाहिए थी। इसके बजाय, उनकी मौत का तुरंत राजनीतिकरण किया गया और इससे हमारे देश के मीडिया पर असहनीय हिंसा की लहर फैल गई। उनकी मौत उस अराजकता, चुनावी हिंसा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन का सीधा नतीजा है। हसीना ने इसके लिए मोहम्मद यूनुस को सीधे तौर पर जिम्मेदार बताया और कहा कि उनके शासनकाल में बांग्लादेश की राजनीति में हिंसा को पनाह दिया गया।












