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  • भारत के इस दोस्त देश में सड़कों पर क्यों उतरे किसान, 350 ट्रैक्टरों संग संसद तक किया मार्च

    पेरिस: फ्रांस में किसानों ने अपनी कम आय और दक्षिण अमेरिका के साथ यूरोपीय संघ (ईयू) के व्यापार समझौते के विरोध में मंगलवार को 350 ट्रैक्टर के साथ संसद तक मार्च किया। किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौते से उनकी आजीविका खतरे में पड़ जाएगी। पुलिस सुरक्षा के बीच, ट्रैक्टरों ने व्यस्त समय के


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    By Azad Hind Desk जनवरी 14, 2026
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    पेरिस: फ्रांस में किसानों ने अपनी कम आय और दक्षिण अमेरिका के साथ यूरोपीय संघ (ईयू) के व्यापार समझौते के विरोध में मंगलवार को 350 ट्रैक्टर के साथ संसद तक मार्च किया। किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौते से उनकी आजीविका खतरे में पड़ जाएगी। पुलिस सुरक्षा के बीच, ट्रैक्टरों ने व्यस्त समय के दौरान चैंप्स-एलिसी और पेरिस की अन्य सड़कों से गुजरते हुए यातायात को अवरूद्ध कर दिया और फिर वे सीन नदी को पार करके नेशनल असेंबली तक पहुंचे।

    फ्रांसीसी किसानों की मांगें क्या हैं

    फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों में किसानों का आक्रोश कई चुनौतियों के चलते बढ़ गया है। मंगलवार को हुए विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे किसान संघों ने कहा कि वे फ्रांस की खाद्य सुरक्षा की रक्षा के लिए ठोस और तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। फ्रांसीसी किसानों ने कहा कि ईंधन, उर्वरक और पशुओं के चारे की बढ़ती लागत के साथ-साथ पर्यावरण संबंधी कड़े नियमों और शक्तिशाली खुदरा विक्रेताओं और खाद्य कंपनियों द्वारा मूल्य को लेकर दबाव बनाये जाने के कारण उनकी आय घट रही है।

    लंबे समय से व्यापार समझौते का विरोध कर रहे किसान

    यूरोपीय संघ के अन्य देशों के किसानों की तरह ही फ्रांसीसी किसान भी लंबे समय से ब्राजील, अर्जेंटीना, बोलीविया, पैराग्वे और उरुग्वे जैसे मर्कोसुर देशों के साथ यूरोपीय संघ के प्रस्तावित व्यापार समझौते का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि इस समझौते से दक्षिण अमेरिकी बीफ, पॉल्ट्री, चीनी और अन्य कृषि उत्पादों का सस्ता आयात बाजार में भर जाएगा, जो अलग-अलग मानकों के तहत उत्पादित होते हैं। इससे यूरोपीय उत्पादकों को नुकसान होगा तथा कीमतें और भी गिरेंगी।

    फ्रांसीसी सरकार ने क्या कहा

    फ्रांस सरकार की प्रवक्ता मौड ब्रेगॉन ने मंगलवार को टीएफ1 टेलीविजन पर कहा कि सरकार किसानों की मदद के लिए जल्द ही नयी घोषणाएं करेगी। राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों और उनकी सरकार यूरोपीय संघ-मर्कोसुर व्यापार समझौते के विरोध में हैं, लेकिन उम्मीद है कि शनिवार को पैराग्वे में इस पर हस्ताक्षर हो जाएंगे, क्योंकि इसे ज्यादातर अन्य ईयू देशों का समर्थन प्राप्त है। इस समझौते पर 1999 से वार्ता हो रही है।

    मर्कोसुर क्या है

    मर्कोसुर दक्षिण अमेरिकी देशों का क्षेत्रीय व्यापार संगठन है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्वारा शनिवार को पैराग्वे में समझौते पर हस्ताक्षर करने की उम्मीद है, क्योंकि पिछले सप्ताह यूरोपीय संघ के सदस्य देशों ने बहुमत के साथ इसका समर्थन किया था। इसके बाद यह यूरोपीय संसद में जाएगा, जहां अगले सप्ताह महीनों तक चलने वाली अनुमोदन प्रक्रिया शुरू होगी। यूरोपीय संसद के 720 सदस्यों में से कई इस समझौते का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन अंतिम मतदान में कांटे का मुकाबला हो सकता है और संसद अंततः इस समझौते को अस्वीकार भी कर सकती है।

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