• National
  • ईरान तो मोहरा है, डॉलर बचाने के लिए BRICS को बर्बाद करना चाहते हैं ट्रंप, बुरा फंसा भारत?

    नई दिल्ली: ईरान में अस्थिरता के बीच अमेरिका अपना उल्लू-सीधा कर रहा है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान की सत्ता के खिलाफ आवाज उठाने वाले प्रदर्शनकारियों को समर्थन के नाम पर वहां सैन्य दखल की धमकी दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान से कारोबार करने वाले देशों को 25% टैरिफ पर डरा


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 14, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    नई दिल्ली: ईरान में अस्थिरता के बीच अमेरिका अपना उल्लू-सीधा कर रहा है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान की सत्ता के खिलाफ आवाज उठाने वाले प्रदर्शनकारियों को समर्थन के नाम पर वहां सैन्य दखल की धमकी दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान से कारोबार करने वाले देशों को 25% टैरिफ पर डरा रहे हैं। ट्रंप के कारनामों के थोड़ा अंदर झांकें तो इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह इसके माध्यम से कहीं न कहीं ब्रिक्स को तबाह करना चाहते हैं, जिससे अमेरिका डरता है कि कहीं यह उसके डॉलर को पलीता न लगा दे।

    ईरान पर ट्रंप नीति से दबाव में भारत!

    ईरान से कारोबार करने वाले देशों पर अमेरिका की 25% टैरिफ की घोषणा पर यही माना जा रहा है कि इससे भारत पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा। फिर भी सरकारी सूत्रों के हवाले से द हिंदू ने रिपोर्ट दी है कि सरकार ‘बाहरी आर्थिक फैक्टरों’ की वजह से मौजूदा वित्त वर्ष में ईरान से व्यापार को और भी कम करने की तैयारी कर रहा है। भारत ऐसा तब कर रहा है, जब भारत-ईरान के राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ का भी साल है।

    भारत कर रहा ब्रिक्स समिट की मेजबानी

    ईरान को लेकर अमेरिकी तेवर को देखते हुए इस महीने होने वाली ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची की संभावित भारत यात्रा पर भी ग्रहण लग गया है। मंगलवार को ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ब्रिक्स 2026 (BRICS 2026) शिखर सम्मेलन के लिए भारत के विजन की घोषणा करते हुए कहा कि ब्रिक्स के अध्यक्ष के तौर पर भारत ऐसे अंतरसरकारी संगठनों की जरूरतों पर जोर देगा, जो ‘वैश्विक झटके’ झेलने में सक्षम हों। वह 18वें ब्रिक्स समिट के लोगो लॉन्च के मौके पर बोल रहे थे, जहां इसके सदस्य राष्ट्रों के राजनयिक भी मौजूद थे। इनमें रूसी राजदूत डेनिस एलिपोव और ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली भी शामिल हैं।

    ब्रिक्स को को बर्बाद करना चाहते हैं ट्रंप?

    भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है, जिनमें ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। 1 जनवरी, 2024 को ईरान भी इसका सदस्य बना है। अब मिस्र, इथियोपिया, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया भी इसके सदस्य हैं। विस्तारित ब्रिक्स को अमेरिका अपने लिए एक नई चुनौती के रूप में देखता है, खासकर इसके डॉलर मुक्त अंतरराष्ट्रीय व्यापार वाले एजेंडे की वजह से। ऐसे में ईरान में सैन्य घुसपैठ के उसके मंसूबे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। यह ट्रंप की ब्रिक्स को बिखरने की एक चाल भी हो सकती है।

    डॉलर बचाने की मुहिम में जुटे हैं ट्रंप!

    2025 के जुलाई में रियो डी जनेरियो में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने क्रॉस बॉर्डर पेमेंट सिस्टम पर बात की थी। इसके लिए ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स भी बना है। तब इसको लेकर भारत ने कहा था कि ‘हमें यकीन है कि आने वाले दिनों में इसमें और प्रगति होगी और देश इसे स्वीकार करने लगेंगे, क्योंकि अधिकतर के लिए यह फायदेमंद होगा।’ इस सिस्टम की विशेषता ये है कि संबंधित देश डॉलर में लेन-देन के लिए बाध्य नहीं होंगे। वह अपनी करेंसी का इस्तेमाल कर सकते हैं। अमेरिका को यही बात तभी से बहुत खटक रही है।

    ट्रंप की बदमिजाजी का क्या है जवाब?

    भारत इस साल जो ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है, उसमें ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के भी पहुंचने की संभावना है। ऐसे में भारत की ईरान नीति पर सबकी नजरें लगी हुई हैं। क्योंकि, अमेरिकी राष्ट्रपति जिस तरह से ईरान में भिड़ने के लिए तैयार बैठे हैं, उससे एक नया कूटनीतिक संकट खड़ा हो सकता है। अमेरिकी खतरे की वजह ईरान की मौजूदा सत्ता जोखिम में पड़ चुकी है और ईरान के ब्रिक्स का सदस्य होने के नाते यह गैर-अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय संगठन भी दबाव महसूस कर सकता है। भारत पहले ही रूस से तेल खरीदने की वजह से ट्रंप की आंखों का कांटा बना हुआ है, अब इसको अपनी ईरान नीति पर चलते रहने की चुनौती मिल रही है!

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।