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  • US Iran News: अमेरिका ने ईरान की ओर भेजा 90 F-35 फाइटर जेट से लैस परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन, होगा हमला?

    वॉशिंगटन/तेहरान: डोनाल्ड ट्रंप ने दो दिन पहले कहा था कि ईरान में प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए ‘मदद निकल चुकी है।’ वहीं ईरान के निर्वासित नेता रेजा पहलवी से रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने मुलाकात की है और कहा है कि ‘मदद निकल चुकी है।’ और इन सबके बीच अब रिपोर्ट आ रही


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    By Azad Hind Desk जनवरी 15, 2026
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    वॉशिंगटन/तेहरान: डोनाल्ड ट्रंप ने दो दिन पहले कहा था कि ईरान में प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए ‘मदद निकल चुकी है।’ वहीं ईरान के निर्वासित नेता रेजा पहलवी से रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने मुलाकात की है और कहा है कि ‘मदद निकल चुकी है।’ और इन सबके बीच अब रिपोर्ट आ रही है कि अमेरिका ने मिडिल ईस्ट की तरफ एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन का बेड़ा भेज दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (ABECSG) को एशिया से मिडिल ईस्ट की तरफ भेजा गया है और वो रास्ते में है। CNO कॉडल ने SNA में रिपोर्टर्स से कहा है कि “नौसेना दो हफ्ते में कहीं भी हो सकती है।”

    द वॉर जोन वायर के रिपोर्टर हॉवर्ड अल्टमैन ने कहा है कि “आपात स्थितियों या यहां तक कि आक्रामक ऑपरेशन्स से निपटने के लिए एक एयरक्राफ्ट कैरियर जरूरी नहीं है।” एक CSG को INDOPACOM से CENTCOM में फिर से तैनात करने में 1-3 हफ्ते लगेंगे और अमेरिकी सेना के पास पहले से ही इस क्षेत्र (और CONUS) में काफी संसाधन हैं जो ईरान पर हमला करने में सक्षम हैं। अमेरिका के डिफेंस पत्रकारों ने बताया है कि पिछले 48 घंटों में, USS थियोडोर रूजवेल्ट और USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश क्रमशः सैन डिएगो और नॉरफॉक से रवाना हुए हैं। दोनों रास्ते में हैं और ये दोनों रूटीन ट्रेनिंग से या चुपचाप तैनाती के लिए निकल सकते हैं। अमेरिकी पत्रकारों ने कहा है कि दोनों में से किसी भी कैरियर ने COMPTUEX पूरा नहीं किया है, जिसका मतलब है कि पनडुब्बियों, अलग अलग युद्धपोतों के साथ अभ्यास नहीं किया है, लेकिन, जैसा कि हमने हाल ही में देखा है, वो ट्रेनिंग छोड़कर तेजी से आगे बढ़ेंगे।

    अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप कितना खतरनाक ?
    एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन के साथ युद्धपोतों का एक विशालकाय बेड़ा है और इसके पास इतनी क्षमता है कि वो ईरान जैसे देश में तबाही मचा सकता है। इसे चलता फिरता युद्ध का मैदान कहा जाता है। अमेरिका के डिफेंस पत्रकारों ने इसके अलावा बताया है कि एयरक्राफ्ट कैरियर जेराल्ड आर. फोर्ड साउदर्न कमांड में तैनात है। आपको बता दें कि अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप अमेरिकी नौसेना के सबसे शक्तिशाली समुद्री यूनिट है और ये परमाणु ऊर्जा से ऑपरेट होता है। जनवरी महीने के पहले हफ्ते में ये एयरक्राफ्ट कैरियर दक्षिण चीन सागर और फिलीपीन सागर में ऑपरेट कर रहा था। अब ये ईरान से बढ़ते तनाव के बीच मध्य पूर्व की तरफ बढ़ गया है। पेंटागन ने इसे दक्षिण चीन सागर से हटाकर मध्य पूर्व की तरफ बढ़ने का आदेश दिया है।

    अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर पर 90 लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टर को ले जाने की क्षमता है। इसपर F-35C लाइटनिंग II और F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान शामिल हैं। इसके अलावा इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर आर्ले बर्क-क्लास गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर भी तैनात हैं। मध्य पूर्व की तरफ इस एयरक्राफ्ट कैरियर के बढ़ने के मतलब है कि इसे बहुत आशंका है कि ईरान पर हमला करने के लिए भेजा जा रहा है। इसके अलावा अगर ईरान, इजरायल पर मिसाइल हमले करता है, तो ये उन मिसाइलों को भी इंटरसेप्ट करने का काम करेगा। जैसा कि पिछले साल जून महीने में देखा गया था। इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर टॉमहॉक मिसाइलें तैनात हैं, जिसकी मार करने की क्षमता 1600 से 2500 किलोमीटर के बीच है, इससे ये ईरान की सीमा में घुसे बगैर राजधानी तेहरान समेत देश के कई हिस्सों में हमला कर सकता है।

    ईरान पर अमेरिकी हमला करीब करीब तय!
    अमेरिकी नेताओं ने ईरान के निर्वासित नेता रेजा पहलवी से मुलाकात करनी शुरू कर दी है। डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने का ऐलान किया है। इसके अलावा अमेरिका ने चुपचाप मिडिल ईस्ट में अपने अहम ठिकानों से अधिकारियों को हटाना शुरू कर दिया है, क्योंकि हमला होने की स्थिति में ईरान काफी खतरनाक पलटवार कर सकता है। वहीं, ईरान ने अचानक अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया है और दोनों तरफ से कड़ी चेतावनियां दी जा रही हैं। इसीलिए अब बहुत आशंका है कि कभी भी ईरान पर हमला शुरू हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को अमेरिका ने कतर में स्थित अल उदीद एयर बेस से अपने कर्मचारियों को वापस बुला लिया है। यहां करीब 10 हजार अमेरिकी सैनिक रहते हैं और कतर ने कहा है कि क्षेत्रीय तनाव की वजह से ऐसा किया जा रहा है।

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