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  • 13 साल से कोमा में शख्स, माता-पिता लगा रहे उसके लिए इच्छा मृत्यु की गुहार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज

    नई दिल्ली: पिछले करीब 13 साल से अचेत अवस्था में बिस्तर पर पड़े उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया (इच्छा मृत्यु) देने पर आज गुरुवार को सुप्रीम अपना फैसला सुनाएगा। आदेश जारी करने से पहले अदालत ने 13 जनवरी को लड़के के माता-पिता से मुलाकात की थी। 100 फीसदी


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    By Azad Hind Desk जनवरी 15, 2026
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    नई दिल्ली: पिछले करीब 13 साल से अचेत अवस्था में बिस्तर पर पड़े उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया (इच्छा मृत्यु) देने पर आज गुरुवार को सुप्रीम अपना फैसला सुनाएगा। आदेश जारी करने से पहले अदालत ने 13 जनवरी को लड़के के माता-पिता से मुलाकात की थी।

    100 फीसदी दिव्यांगता के शिकार हो चुके बेटे के ठीक होने की उम्मीद छोड़ चुके हरीश के माता-पिता ने ही उसे इच्छामृत्यु देने की मांग की है। इससे पहले सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा की मेडिकल हालत को लेकर एम्स को रिपोर्ट देने को कहा था। 18 दिसंबर को सुनवाई के दौरान एम्स की रिपोर्ट देखकर जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने गहरी निराशा जाहिर की थी।

    यह बेहद दुखद रिपोर्ट: जस्टिस पारदीवाला

    जस्टिस पारदीवाला ने कहा था कि यह बेहद दुखद रिपोर्ट है। यह हमारे लिए मुश्किल फैसला है, लेकिन हम इस लड़के को यूं अपार दुख में नहीं रख सकते। हम उस स्टेज में हैं, जहां आज हमें आखिरी फैसला लेना होगा। कोर्ट एम्स की कॉपी रिपोर्ट को एडिशनल सॉलिसीटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और याचिकाकर्ता के वकील रश्मि नंदकुमार को देने को कहा है। अदालत ने दोनों वकीलों से आग्रह किया था कि वह इस रिपोर्ट का अध्ययन कर लड़के के परिवार से बात करें। अदालत उनसे बात कर आज अंतिम निर्णय सुनाएगा।

    एम्स से पहले सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के जिला अस्पताल से रिपोर्ट मांगी थी। उस रिपोर्ट में भी कहा गया था कि हरीश की हालत बेहद ही खराब है। उसके ठीक होने की कोई संभावना नहीं है।

    क्या था मामला?

    चंडीगढ़ में रहकर पढ़ाई कर रहे हरीश 2013 में अपने हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं थीं। उसके बाद से वह लगातार बिस्तर में अचेत हालत में हैं। लगातार बिस्तर पर पड़े रहने के कारण उनके शरीर पर घाव बन गए हैं।

    क्या होती है पैसिव यूथेनेशिया की प्रक्रिया?
    पैसिव यूथेनेशिया की प्रक्रिया के तहत, पहले प्राइमरी और सेकंडरी मेडिकल बोर्ड की परमिशन ली जाती है। यदि दोनों रिपोर्टों में कोई विरोधाभास होता है तो मामला कोर्ट जाता है। इसके बाद अदालत एक स्वतंत्र समिति का गठन कर सकती है, जिसमें तीन डॉक्टर शामिल होते हैं। इन डॉक्टरों के पास क्रिटिकल केयर का अनुभव होना चाहिए और चिकित्सा पेशे में कम से कम 20 साल का अनुभव होना चाहिए।

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