रॉकेट-मिसाइल फोर्स समय की जरूरत
भारत 15 जनवरी, 2026 को हर साल की तरह सेना दिवस ( Army Day ) मना रहा है। इसी मौके पर हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवदी ने भी इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा आवश्यकताएं ऐसी स्पेशलाइज्ड मिलिट्री यूनिट की ओर देखने को कह रही हैं, जिसमें एक कमांड के भीतर लंबी दूरी के रॉकेट और मिसाइल तैनात हों। उन्होंने कहा, ‘हम एक रॉकेट-मिसाइल फोर्स की ओर देख रहे हैं, क्योंकि पाकिस्तान ने एक रॉकेट फोर्स गठित कर लिया है और चीन ने भी ऐसी फोर्स बना ली है। यह समय की जरूरत है।’
अभी अलग-अलग यूनिट संभालते हैं
अभी भारत के मिसाइल और रॉकेट भंडार को आर्मी एयर डिफेंस कोर (AAD) और आर्टिलरी रेजिमेंट संभालते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारत ने अपनी लंबी-दूरी की मारक क्षमताओं को बढ़ाने की कोशिशों पर पूरा जोर दे रखा है। आर्मी चीफ का कहना है कि नए जमाने के जंग में रॉकेट और मिसाइल एक-दूसरे पर निर्भर हो गए हैं। उनका कहना है, ‘आज आप देखेंगे कि रॉकेट और मिसाइलें आपस में एक-दूसरे से जुड़ गए हैं, अगर हम कोई असर डालना चाहते हैं, तो रॉकेट और मिसाइल दोनों ही ऐसा कर सकते हैं।’ वैसे दोनों अलग-अलग हैं और रॉकेट के उलट मिसाइल तय टारगेट को हिट करने के लिए बनाई गई है, जिसमें इंटर्नल गाइडेंस सिस्टम भी होते हैं।
भारत में कई तरह के मिसाइल और रॉकेट
इस समय भारतीय सशस्त्र सेना के पास स्वदेशी और साझा तौर पर विकसित कई तरह की मिसाइलों की बड़ी खेप है। इसमें अग्नि, ब्रह्मोस, पृथ्वी, प्रलय जैसी मिसाइलें शामिल हैं। कुछ ही दिन पहले भारत ने 120 किमी की अधिकतम रेंज वाले पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का भी परीक्षण किया है। आर्मी चीफ के अनुसार 300 से 450 किलो मीटर की रेंज वाली मिसाइलों के लिए कॉन्टैक्ट भी साइन हो चुके हैं।
चीन, पाकिस्तान के पास अलग मिसाइल यूनिट
आज की तारीख में चीन और पाकिस्तान दोनों के पास अलग से रॉकेट-मिसाइल मिलिट्री यूनिट हैं। मसलन, चीन ने इसके लिए पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (PLARF)बना रखा है। वहीं ऑपरेशन सिंदूर में भारत से बुरी तरह से पिटने के बाद पाकिस्तान ने भी चीन की तर्ज पर आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड (ARFC) बना ली है। अमेरिकी पेंटागन की रिपोर्ट कहती है कि चीन के पीएलएआरएफ के पास 1,250 से ज्यादा बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें हैं। यही नहीं, उसके पास 600 से ज्यादा न्युक्लियर वॉरहेड भी हैं, जो 2030 तक 1,000 से ज्यादा तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, पाकिस्तान के पास भारत से ज्यादा न्युक्लियर वॉरहेड हो सकते हैं, लेकिन बाकी मिसाइलों और रॉकेट के मामले में उसके हाथ काफी तंग हैं। जबकि, चीन की हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी हमसे कहीं आगे है।
ईरान के पास ताकतवर रॉकेट-मिसाइल फोर्स
भारत रॉकेट-मिसाइल फोर्स बनाना चाहता है तो उसे ईरान से सीखने के लिए बहुत कुछ मिल सकता है। ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर एयरोस्पेस फोर्स (IRGCASF) इसके अत्याधुनिक मिसाइलों के भंडारन और संचालन की जिम्मेदारी संभालती है, जो उसके एयरफोर्स के समानांतर काम करती है। ईरान की मिसाइल यूनिट के पास बैल्स्टिक, हाइपरसोनिक और क्रूज मिसाइलों का बड़ा जखीरा है। यह यूनिट लड़ाकू ड्रोन का संचालन भी देखती है और सीधे ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को रिपोर्ट करती है।
ईरान के पास मिसाइल-रॉकेट के लिए टनल नेटवर्क
ईरान की एयरोस्पेस फोर्स की क्षमता पर दुनिया ने तब ज्यादा गौर किया, जब पिछले साल इजरायल के साथ कुछ समय के लिए इसकी लड़ाई शुरू हो गई। इस यूनिट की मिसाइलों ने इजरायल के ताकतवर आयरन डोम को भी नाकाम कर दिया और करीब 25 लोगों की जान चली गई। ईरान के रॉकेट फोर्स की सबसे बड़ी ताकत इसे अंडरग्राउंड सुरंगों में छिपाकर रखना है, जिसका एक विशाल नेटवर्ग बना हुआ है। ईरान की मिसाइलें इन्हीं सुरंगों में रखी गई हैं, जहां से इन्हें छिपाकर दागा जा सकता है, जिससे इनका पता लगाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है।
इसी वजह से अमेरिका-इजरायल भी कांपता है!
अमेरिकी अनुमानों के अनुसार ईरान के पास करीब 3,000 बैलिस्टिक मिसाइल हैं, जो मध्य एशिया में सबसे ज्यादा है। एक्सपर्ट का तब भी कहना था कि ईरान के रॉकेट फोर्स और हथियारों ने तब इजरायल और अमेरिका को भी उसके खिलाफ पूर्ण युद्ध शुरू करने से रोक दिया था। ईरान अभी सरकार विरोधी विशाल प्रदर्शनों का सामना कर रहा है। ऐसे में कहीं न कहीं वह अपने इस हथियार का इस्तेमाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के जवाब के तौर पर भी कर सकता है।















