• Religion
  • Mauni Amavasya 2026 : मौनी अमावस्या पर बना दुर्लभ अर्धोदय योग, स्कंदपुराण में बताया गया है इसका बड़ा लाभ, जानकर मन खुश हो जाएगा

    मौनी अमावस्या 2026 बेहद शुभ योग में होने जा रहा है। दरअसल अबकी बार मौनी अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ अर्धोदय योग का भी संयोग बनने जा रहा है। माघ मास में पड़ने वाली अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन स्नान, दान और पितरों का तर्पण करने से अत्यंत


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 16, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    मौनी अमावस्या 2026 बेहद शुभ योग में होने जा रहा है। दरअसल अबकी बार मौनी अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ अर्धोदय योग का भी संयोग बनने जा रहा है। माघ मास में पड़ने वाली अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन स्नान, दान और पितरों का तर्पण करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर पवित्र में जल में स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। वहीं, इस बार मौनी अमावस्या पर अर्धोदय योग का बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है। स्कंदपुराण अनुसार इस योग में स्नान, दान आदि कार्य करने से मेरू समान फल प्राप्त होता है यानी पर्वत समान महान दान का फल मिलता है।

    मौनी अमावस्या पर बना दुर्लभ अर्धोदय योग
    मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार के दिन रहेगी। माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि इस बार रविवार के दिन पड़ने और साथ में व्यतीपात योग भी होने से दुर्लभ अर्धोदय योग बनेगा। स्कंदपुराण में इस योग को बहुत पुण्यदायी बताया गया है। स्कंद पुराण के अनुसार, अर्धोदय योग में सभी स्थानों का जल गंगा के जल के समान हो जाता है और सभी ब्रह्म के समान शुद्धात्मा वाले हो जाते हैं। साथ ही, इस अर्धोदय योग में स्नान दान आदि पुण्य कार्य करने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है।

    अर्धोदय योग वाली अमावस्या का दान
    स्कंदपुराण के अनुसार, अगर अमावस्या तिथि पर अर्धोदय योग बन रहा हो तो इस दिन चांदी और स्वर्ण दान करने का भी बहुत खास महत्व होता है। ऐसे में आप सामर्थ्य अनुसार, किसी जरूरतमंद को स्वर्ण या चांदी का दान कर सकते हैं। साथ ही, पृथ्वी पर अक्षतों का अष्टदल लिखकर उसपर ब्रह्मा, विष्णु और शिव स्वरूप उपर्युक्त पात्र को स्थापित करके धूप, दीप, पुष्प आदि से पूजा करें। फिर, पुरोहित को दे दें। मान्यता है कि ऐसा करने से पृथ्वी दान करने के बराबर फल की प्राप्ति होती है। पुराण के अनुसार, इस योग में गोदान, शय्यादान आदि जो भी देय द्रव्य हों वे तीन-तीन होने चाहिए। अर्धोदय योग के अवसर पर सतयुग में वसिष्ठजी ने, त्रेता में श्रीरामचंद्र जी ने, द्वापर में धर्मराज ने और कलियुग में पूर्णोदर ने कई प्रकार के दिन धर्म किए थे। ऐसे में मौनी अमावस्या पर दान करने से अत्यंत पुण्य फल की प्राप्ति हो सकती है।

    अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। ऐसे में इस दिन पिंडदान और पितरों के लिए तर्पण अवश्य करना चाहिए। इससे पितर प्रसन्न होते हैं और इनकी कृपा परिवार के सदस्यों पर बनी रहती है। साथ ही, जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।