एक अधिकारी ने बताया, “जो लोग UAN सिस्टम शुरू होने से पहले EPFO से जुड़े थे, उन्हें अक्सर अपने पुराने सर्विस रेकॉर्ड को वेरिफाई करने में परेशानी होती है। इसकी कई वजहें हो सकती हैं, जैसे कंपनी बंद हो जाना या कागजात का ठीक से न होना। इस समस्या को हल करने के लिए, नई तकनीकों का इस्तेमाल करने और ऐसे मॉडल बनाने की योजना है जो क्लेम और सदस्य की प्रामाणिकता के बारे में निष्कर्ष निकालने में मदद कर सकें।”
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क्या होगा फायदा?
इन एडवांस तकनीकों का इस्तेमाल उन सदस्यों की मदद करेगा जो अपने अलग-अलग जगहों पर काम करने के कारण अपने कई मेंबर अकाउंट्स को यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) से मर्ज नहीं कर पाते। रेकॉर्ड में अनियमितताओं के कारण ऐसा होता है। इसके अलावा ये तकनीकें उन सदस्यों के लिए भी फायदेमंद होंगी जो इनऑपरेटिव अकाउंट्स का क्लेम करना चाहते हैं।
2014 में शुरू हुआ 12 अंकों का UAN एक यूनिक पहचान नंबर है। यह अलग-अलग एम्प्लॉयर्स से मिले सभी मेंबर आईडी के लिए एक छाते की तरह काम करता है। इससे सदस्य अपने पूरे करियर के दौरान अपने सभी प्रोविडेंट फंड से जुड़े योगदानों को एक ही नंबर के तहत मैनेज कर सकते हैं। इससे PF को ट्रैक करना, ट्रांसफर करना और ऑनलाइन एक्सेस करना आसान हो जाता है। नए सदस्यों के लिए भी यह अपने अकाउंट्स को पोर्ट करना आसान बनाता है क्योंकि यह UAN से जुड़ा होता है।
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PF कंट्रीब्यूशन
सरकार के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2024 तक 20.3 करोड़ UAN अलॉट किए जा चुके थे, जबकि 30 करोड़ से ज्यादा मेंबर अकाउंट्स थे। इनमें से 7.3 करोड़ UAN एक्टिव रूप से रिटायरमेंट फंड बॉडी में योगदान कर रहे हैं। प्राइवेट जॉब करने वाले वर्कर्स के मूल वेतन में से 12 फीसदी उनके पीएफ अकाउंट में जाता है। इसी तरह एम्प्लॉयर के हिस्से के 12 फीसदी में से 3.67% पेंशन फंड में और 8.33% हिस्सा कर्मचारी के पीएफ अकाउंट में जाता है।













