डेटा एनालिटिक्स कंपनी केप्लर (Kpler) के मुताबिक इस महीने के पहले पखवाड़े में भारत ने रूस से हर दिन औसतन 1.18 मिलियन बैरल तेल खरीदा। यह पिछले साल की इसी अवधि और 2025 के औसत से करीब 30 फीसदी कम है। वहीं दिसंबर की तुलना में भी यह करीब 3 फीसदी कम है।
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इन कंपनियों ने खरीदा रूसी तेल
- अमेरिका के प्रतिबंधों की वजह से रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले भारतीय खरीदारों की संख्या काफी कम हो गई है।
- इस महीने अब तक केवल इंडियन ऑयल, नायरा एनर्जी और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) ने ही रूस से तेल खरीदा है।
- इंडियन ऑयल ने इस महीने करीब आधा मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा है। यह रूस से भारत आने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग 43 फीसदी है।
- इंडियन ऑयल द्वारा मई 2024 के बाद से सबसे ज्यादा तेल की खरीद है और 2025 के औसत से 64 फीसदी ज्यादा है।
- नायरा एनर्जी इस महीने दूसरी सबसे बड़ी खरीदार रही। इसने करीब 471,000 बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा, जो रूस से भारत आने वाले कुल तेल का लगभग 40 फीसदी है।
- यह पिछले कम से कम दो सालों में उसकी सबसे बड़ी खरीद है और 2025 के उसके औसत से 56 फीसदी ज्यादा है।
- बीपीसीएल (BPCL) ने करीब 200,000 बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा, जबकि पिछले साल उसका औसत 1,85,000 बैरल प्रतिदिन था।
रिलायंस समेत इन कंपनियों ने नहीं की खरीदारी
रिलायंस इंडस्ट्रीज के अलावा, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL), एचपी सीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (HPCL-Mittal Energy Ltd) और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (Mangalore Refinery & Petrochemicals Ltd) ने इस महीने के पहले पखवाड़े में रूस से कोई तेल नहीं खरीदा है।
तेल की कीमत में बढ़ाई छूट
कुछ भारतीय और चीनी खरीदारों की घटती दिलचस्पी के कारण रूसी सप्लायर ने तेल की कीमतों में छूट बढ़ा दी है। उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि रूस के प्रमुख यूराल्स कच्चे तेल पर भारतीय बंदरगाहों पर डिलीवरी के लिए छूट करीब 5 से 6 डॉलर प्रति बैरल हो गई है, जो अक्टूबर में अमेरिका द्वारा रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसे रूस के शीर्ष दो निर्यातकों पर प्रतिबंध लगाने से पहले करीब 2 डॉलर प्रति बैरल थी। इंडस्ट्री के अधिकारियों ने बताया कि इंडियन ऑयल ने इस छूट का फायदा उठाने के लिए जनवरी में रूसी तेल की अपनी खरीद बढ़ा दी है।













