फरीद जकारिया ने बरखा दत्त को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि “डोनाल्ड ट्रंप की सोच एक अहंकारी राजा जैसी है, लेकिन चीजों को ठीक करने के लिए मोदी को ही पहल करनी होगी”। फरीद ने कहा कि “डोनाल्ड ट्रंप को तारीफ पसंद है, उन्हें 1000 हाथियों, महाराजाओं, अंबानी, अडानी के साथ एक शानदार दावत दीजिए!” उन्होंने कहा कि “भारत और अमेरिका के संबंध में हुए नुकसान की अभी भी भरपाई हो सकती है, लेकिन उसके लिए प्रधानमंत्री मोदी को ही पहल करनी होगी।”
क्या भारत-अमेरिका संबंध सुधर सकते हैं?
फरीद जकारिया ने कहा कि “डोनाल्ड ट्रंप से संबंध सुधारने की पहल मोदी को ही करनी होगी। डोनाल्ड ट्रंप, जो एक बात बहुत अच्छे तरीके से समझते हैं कि कहां उनके हाथ में कौन सा कार्ड है, उन्हें कहां बढ़त हासिल है। जब चीन के खिलाफ उन्होंने टैरिफ लगाया था और जब चीन ने पलटवार करते हुए अमेरिका के खिलाफ भी टैरिफ थोप दिया था, तो ट्रंप इस बात को समझ गये थे। उन्होंने सिर्फ दुर्लभ खनिज की ही नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन की भी बहुत अच्छे से समझ है। इसीलिए चीन ने जैसे ही टैरिफ लगाया, ट्रंप पीछे हट गये। लेकिन भारत को लेकर उन्हें पता है कि उनके पास बढ़त है। वो भारत का फायदा उठा सकते हैं। और वो जानते हैं कि चीन के मुकाबले भारत की इकोनॉमी काफी कमजोर है। इसीलिए डोनाल्ड ट्रंप से इस बात की उम्मीद बिल्कुल भी मत रखिए, कि भारत को लेकर पीछे हट जाएंगे, या स्टैजरिक तरीके से वो भारत से किसी तरह की डील करेंगे। आज की तारीख में उनके पास शक्ति है और वो उसका इस्तेमाल करेंगे।”
वहीं, पाकिस्तान को लेकर फरीद जकारिया ने इंटरव्यू में कहा कि “पाकिस्तान के असीम मुनीर शायद ट्रंप को लुभाने में अच्छे हों, लेकिन पेंटागन पाकिस्तान को चीन की एक शाखा के तौर पर देखता है”। उन्होंने इंटरव्यू के दौरान कहा कि “यह काफी चिंताजनक है कि डोनाल्ड ट्रंप, पाकिस्तान के बहकावे में आ रहे हैं और पाकिस्तान उन्हें उसी तरह से लुभाने की भी कोशिश कर रहा है। असीम मुनीर के अंदर ट्रंप को लुभाने की शानदार क्षमता है। इसीलिए उन्होंने ट्रंप को नोबेल प्राइज के लिए भी नॉमिनेट किया था। लेकिन देखिए, ये सब असलियत को बदल नहीं सकते हैं। भारत को एक चीज जो करना चाहिए, वो ये कि पेंटागम के साथ और मजबूत संबंध बनाए, विदेश मंत्रालय से अच्छे संबंध बनाए। क्योंकि हकीकत यही है कि पाकिस्तान, चीन का सैटेलाइट स्टेट है और पेंटागन इस बात को अच्छे तरीके से जानता है। भारत को यही चीज समझने की जरूरत है।”












