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  • ‘छात्र स्यूसाइड में संस्थान तुरंत करें रिपोर्ट’, आत्महत्या मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए अंतरिम निर्देश

    नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में स्यूसाइड की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से दुखी है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोर्ट ने कुछ अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सभी ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कुछ अंतरिम


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    By Azad Hind Desk जनवरी 18, 2026
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    नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में स्यूसाइड की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से दुखी है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोर्ट ने कुछ अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सभी ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कुछ अंतरिम निर्देश जारी किए उच्च शिक्षण संस्थानों को आत्महत्या की किसी भी घटना की रिपोर्ट करनी होगी, चाहे वह छात्रावास में हुई हो, PG या या किसी ऑनलाइन छात्र के साथ हुई हो।

    सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी पारदीवाला की अगुवाई वाली बेंच ने 15 जनवरी को दिए निर्देश में कहा है कि स्कॉलरशिप मिलने में देरी के कारण फीस जमा न कर पाने वाले किसी भी स्टूडेंट को संस्थान परीक्षा देने से रोक नहीं सकते। न ही उसे क्लास में उपस्थित होने से वंचित कर सकते हैं। इस आधार पर स्टूडेंट का दस्तावेज भी नहीं रोका जा सकता है। सभी पेंडिंग स्कॉलरशिप भुगतान संबंधित केंद्रीय या राज्य प्राधिकरण चार महीने के भीतर निपटाएं।

    आत्महत्याओं को रोकने लिए कोर्ट ने किया था NTF का गठन

    सुप्रीम कोर्ट ने ये निर्देश 24 मार्च 2025 के उस आदेश के अनुपालन में दिए, जिसमें कोर्ट ने छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को दूर करने और उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ती आत्महत्याओं को रोकने के लिए एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स (NTF) का गठन किया था।

    सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एस. रविंद्र भट की अध्यक्षता में इस NTF देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में आत्महत्या के मामलों की निगरानी कर रही है।

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