• International
  • इस्लामिक नाटो का तोड़ ‘मेडिटेरेनियन क्वाड’, पाकिस्तान को रोकने के लिए भारत बनेगा 3+1 का हिस्सा? UAE पर नजर

    दुबई: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सोमवार को भारत आ रहे हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया के बड़े हिस्से में हलचल मची है। ईरान में अमेरिकी हमले के अंदेशे से तनाव है तो कभी आयरन ब्रदर्स कहलाने वाले सऊदी अरब और UAE के


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 18, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    दुबई: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सोमवार को भारत आ रहे हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया के बड़े हिस्से में हलचल मची है। ईरान में अमेरिकी हमले के अंदेशे से तनाव है तो कभी आयरन ब्रदर्स कहलाने वाले सऊदी अरब और UAE के बीच यमन में टकराव है। दूसरी ओर पाकिस्तान की ओर से तुर्की और सऊदी अरब के साथ मिलकर इस्लामिक नाटो जैसा गुट बनाने की कोशिश हो रही है, जो भारत की चिंता बढ़ा रहा है।

    यूरेशियन टाइम्स के मुताबिक, सऊदी और पाकिस्तान बीते साल ही रक्षा समझौता कर चुके हैं। इस डील के तहत दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले को अपने खिलाफ हमला मानने का वादा किया है। अब इसमें तुर्की के शामिल होने की संभावना है। दूसरी ओर करीबी सहयोगी भारत और यूएई की इन घटनाओं पर नजर है। दोनों देश इस गुट से पार पाने के लिए नए गठबंधन की ओर देख सकते हैं।

    नया ‘QUAD’ बन रहा है?

    ग्रीस, साइप्रस और इजरायल ने त्रिपक्षीय सैन्य सहयोग योजना पर हस्ताक्षर किए हैं, जो गहरे रक्षा संबंधों को औपचारिक रूप देता है। इसमें संयुक्त अभ्यास, मानव रहित सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध ट्रेनिंग और क्षेत्रीय स्थिरता पर विशेषज्ञता का आदान-प्रदान शामिल है। भारत को इजरायल, ग्रीस और साइप्रस ने ‘3+1’ शिखर सम्मेलन और रणनीतिक मंच में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। भारत के इन तीनों देशों के साथ करीबी संबंध हैं।

    यह योजना एक त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन के बाद आई है। इसमें द्विपक्षीय कार्य योजनाएं शामिल हैं, जो साझा खतरों और विशेष रूप से तुर्की के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा गठबंधन का संकेत देती है। इस सहयोग को तुर्की के लिए रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इसमें इजरायल, ग्रीस और साइप्रस के साथ भारत आता है तो यह एक बड़ी ताकत बन जाएगी।

    सऊदी, पाकिस्तान और तुर्की

    ग्रीस, साइप्रस और इजरायल के साथ आने की संभावना को सऊदी, पाकिस्तान और तुर्की के गठबंधन से बल मिल रहा है। सऊदी का पैसा, पाकिस्तान के परमाणु हथियार और तुर्की सेना एक सामूहिक रक्षा ढांचा बना रहे हैं, जिसे इस्लामिक नाटो कहा जा रहा है। तुर्की के रणनीतिक हित तेजी से सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ मिल रहे हैं। तीनों देश सैन्य समन्वय कर रहे हैं।

    दक्षिण एशिया में इस समय भारत-पाकिस्तान के संबंध बहुत खराब दौर से गुजर रहे हैं। बीते साल भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद से दोनों देशों के बीच संबंध बेहद निचले स्तर पर हैं। ऐसे में पाकिस्तान तुर्की और सऊदी अरब पर डोरे डाल रहा है, जिनसे उसको भारत के साथ किसी संघर्ष की स्थिति में आर्थिक और सैन्य मदद मिल सकती है।

    यूएई के इजरायल, भारत से संबंध

    सऊदी-पाकिस्तान-तुर्की रणनीतिक गठबंधन भारत के लिए बड़ी रणनीतिक चिंताएं पैदा करता है। वहीं सऊदी की ताकत यूएई के लिए चिंता का सबब है। भारत के इजरायल, ग्रीस, साइप्रस से अच्छे संबंध हैं तो यूएई के भी इजरायल से अच्छे संबंध हैं। ऐसे में यूएई भारत और इजरायल के साथ सुरक्षा संबंधों का विस्तार कर सकता है। भविष्य में संभव है कि यूएई, भारत, इजरायल एक गुट में दिखें। हालांकि अभी इस पर कुछ कहना जल्दीबाजी होगी।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।