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  • कई राज्यों में ‘मुफ्त’ बिजली के बावजूद, सरकारी कंपनियों की वजह से डिस्कॉम को ₹2,700 करोड़ का मुनाफा

    नई दिल्ली: कई राज्यों में मुफ्त बिजली व्यवस्था के बावजूद 2024-25 के दौरान सरकारी और निजी बिजली कंपनियों ने 2700 करोड़ का मुनाफा कमाया है। जबकि इससे पहले 25,553 करोड़ के घाटे का सामना करना पड़ा था। विद्युत मंत्रालय के अधिकारियों ने इसका श्रेय राज्य सरकारों द्वारा संचालित सरकारी बिजली कंपनियों को दिया है। विद्युत


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    By Azad Hind Desk जनवरी 19, 2026
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    नई दिल्ली: कई राज्यों में मुफ्त बिजली व्यवस्था के बावजूद 2024-25 के दौरान सरकारी और निजी बिजली कंपनियों ने 2700 करोड़ का मुनाफा कमाया है। जबकि इससे पहले 25,553 करोड़ के घाटे का सामना करना पड़ा था। विद्युत मंत्रालय के अधिकारियों ने इसका श्रेय राज्य सरकारों द्वारा संचालित सरकारी बिजली कंपनियों को दिया है।

    विद्युत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह सुधार मुख्य रूप से सरकारी बिजली कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन के कारण हुआ है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में निजी वितरण कंपनियों ने मुनाफा कमाया है, यह मुनाफा 2024-25 में और बढ़ा है। उन्होंने कहा, सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के घाटे में आई भारी कमी ने इस सकारात्मक नतीजे में अहम भूमिका निभाई है।

    इन कारणों से बिजली कंपनियों ने किया बेहतरीन प्रदर्शन

    केंद्र सरकार ने बताया कि बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण, स्मार्ट मीटर का तेजी से विस्तार, सब्सिडी का पारदर्शी तरीके से हिसाब-किताब इस सबने बिजली वितरण कंपनियों को बेहतरीन प्रदर्शन बनाने में मदद की है। इसमें सब्सिडी का प्रावधान सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई राज्य उपभोक्ताओं को एक निश्चित सीमा तक मुफ्त बिजली देने की घोषणा कर रहे हैं। यदि बजट में इस धनराशि का प्रावदान नहीं किया जाता है, तो वितरण कंपनियों को इसका बोझ उठाना पड़ता है।

    सरकार ने बताया कि इसके अतिरिक्त वितरण कंपनियों के लिए एक समान प्रणाली लागू करना, वित्तीय प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए अधिक पारदर्शिता लाना, कानूनी अनुबंधों को लागू करना और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना, जिससे नई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश को बढ़ावा मिले, जैसे उपायों ने भी वित्तीय प्रदर्शन को सुधारा है।

    कई स्तरों पर दिख रहा सुधारों का असर

    विद्युत क्षेत्र में हो रहे इन सुधारों का असर न केवल मुनाफे पर दिख रहा है, बल्कि अन्य स्तरों पर भी देखे जा रहे हैं। इसमें कुल तकनीकी और वाणिज्यिक (AT&C) नुकसानों में कमी और बिजली आपूर्ति की औसत लागत और प्राप्त औसत राजस्व के बीच के अंतर का कम होना शामिल है।

    तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसानों में कमी 2013-14 में 22.6% से घटकर 2024-25 में 15% हो गई हैं। देर से भुगतान पर सरचार्ज के नियमों जैसे सुधारों के कारण जनरेटिंग कंपनियों को बकाया भुगतान में 96% की कमी आई है, जो 2022 में 1.4 लाख करोड़ रुपये से घटकर जनवरी 2026 तक 4,927 करोड़ रुपये रह गया है।

    2022-23 में 6.8 लाख करोड़ था कुल घाटा

    PwC इंडिया के पार्टनर, संबितोष मोहपात्रा ने कहा कि कुछ राज्य वितरण कंपनियों का मुनाफे में लौटना केवल एक अकाउंटिंग प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक संरचनात्मक बदलाव का संकेत है। यह बेहतर बिलिंग प्रक्रिया, सब्सिडी के बेहतर प्रबंधन और चुनिंदा टैरिफ के कारण है। हालांकि, वितरण कंपनियों के लिए अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना बाकी है। 2022-23 में इन कंपनियों का कुल घाटा 6.8 लाख करोड़ रुपये था।

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