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  • Ratha Saptami 2026 Date : रथ सप्तमी कब है? जानें सही डेट, मुहूर्त और पूजा विधि मंत्र सहित

    माघ मास में पड़ने वाली इस सप्तमी तिथि का बेहद विशेष महत्व है। मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ में सूर्य देवता की पहली किरण इसी तिथि को पृथ्वी तिथि पर आई थी। रथ सप्तमी को माघी सप्तमी, महती सप्तमी, सप्त सप्तमी, पुत्र सप्तमी आदि के नाम से भी जाना जाता है। सूर्यदेव का अवतरण


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    By Azad Hind Desk जनवरी 20, 2026
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    माघ मास में पड़ने वाली इस सप्तमी तिथि का बेहद विशेष महत्व है। मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ में सूर्य देवता की पहली किरण इसी तिथि को पृथ्वी तिथि पर आई थी। रथ सप्तमी को माघी सप्तमी, महती सप्तमी, सप्त सप्तमी, पुत्र सप्तमी आदि के नाम से भी जाना जाता है। सूर्यदेव का अवतरण इसी दिन हुआ था। ऐसी मान्यता है कि रथ सप्तमी के दिन भगवान सूर्य की पूजा और व्रत करने से पापों का नाश होता है। साथ ही, मनुष्य को उत्तम लोक में स्थान मिलता है। पद्म पुराण और भविष्य पुराण में भी इस व्रत की महिमा के बारे में बताया गया है। आइए जानते हैं कि इस बार रथ सप्तमी कब है, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र…

    रथ सप्तमी 2026 कब है ? ( Ratha Saptami 2026 Date )
    पंचांग के अनुसार, माघ मास में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि का आरंभ 24 जनवरी, शनिवार को रात में 12 बजकर 40 मिनट पर होगा। वहीं, इस तिथि का समापन 25 जनवरी, रविवार को रात में 11 बजकर 11 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, रथ सप्तमी इस बार 25 जनवरी की रहेगी। इस दिन स्नान, दान, व्रत और सूर्य देव की पूजा करना शास्त्र सम्मत होगा। वहीं, इस बार सप्तमी बेहद खास रहने वाली है क्योंकि इस दिन सूर्य जयंती होने के साथ-साथ रविवार का दिन पड़ रहा है जो सूर्य देवता को समर्पित माना जाता है।

    रथ सप्तमी 2026 स्नान और पूजा का शुभ मुहूर्त
    माघ मास की सप्तमी तिथि पर स्नान करने का सबसे उत्तम समय सुबह 5 बजकर 32 मिनट से लेकर 7 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।
    रथ सप्तमी पर सूर्य देव की पूजा, दान आदि का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 13 मिनट से लेकर दोपहर के 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इस अवधि के दौरान पूजा करना सर्वोत्तम होगा।

    रथ सप्तमी पूजा विधि और मंत्र ( Ratha Saptami Puja Vidhi And Mantra)

    • माघी सप्तमी को सूर्योदय के बाद स्नान करना चाहिए। इसके लिए पहले आक के सात पत्तों और बेर के सात पत्तों को कसुम्भा की बत्ती वाले तिल-तैल पूर्ण दीपक में रखकर उसे सिर पर रख लें। इसके बाद, सूर्य देवता का ध्यान करते हुए गन्ने से जल को हिलाकर दीपक को बहते जल में प्रवाहित कर दें।
    • दीपक बहाने से पहले ‘नमस्ते रुद्ररूपाय रसानां पतये नमः। वरुणाय नमस्तेऽस्तु’ मंत्र बोलकर दीपक को पानी में बहा दें। फिर ‘यद् यज्जन्मकृतं पापं यच्च जन्मान्तरार्जितम। मनोवाक्कायर्ज यच्च ज्ञाताज्ञाते च ये पुनः, इति सप्तविधं पापं स्नानान्ते सप्तसप्तिके। सप्तव्याधिसमाकीर्णं हर भास्करि सप्तमि।’ इनका जाप करते हुए केशव और सूर्य को देखकर गंगाजल अथवा चरणामृत को जल में डालकर स्नान करने से पाप दूर हो जाते हैं।
    • सूर्य को जल देने के लिए अक्षत, पुष्प, दूर्वा, जल, गन्ध, सात आक के पत्ते और बदरी पत्र रखकर ‘सप्तसप्तिवह प्रीत सप्तलोकप्रदीपन, सप्तम्या सहितो देव गृहाणार्घ्य दिवाकर।’ से सूर्य को और ‘जननी सर्वलोकानां सप्तमी सप्तसप्तिके, सप्तव्याहृतिके देवि नमस्ते सूर्यमण्डले।’ से सप्तमी को अर्घ्य देना चाहिए।
    • सप्तमी तिथि के दिन निमित्त प्रातः स्नानादि से निश्चिन्त होकर समीप में सूर्य मंदिर हो तो उसके सामने बैठे अथवा सुवर्णादि की छोटी मूर्ति हो तो उसे अष्टदल कमल के बीच में स्थापित करके ‘ममाखिलकामना-सिद्ध्यर्थे सूर्यनारायणप्रीतये च सूर्यपूजनं करिष्ये।’ से संकल्प करके ‘ओम सूर्याय नमः’ इस नाम मंत्र से अथवा पुरुष सूक्तादि से आवाहनादि षोडशोपचार पूजन करें।
    • इसी सप्तमी को उपवास करके सूर्य का पूजन करके उनको रथ में स्थापित करके और प्रत्येक शुक्ल सप्तमी को पूजन करके वर्ष के अन्त में ब्राह्मण को दें। इस तिथि पर सूर्य भगवान की पूजा करके उपवास करने से सात जन्म के पाप दूर हो सकते हैं।
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