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  • ट्रंप के गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने की जल्दी में क्यों नहीं है भारत? ये हैं 3 बड़े कारण

    नई दिल्ली: टैरिफ को लेकर भारत-अमेरिका के रिश्तों में तल्खी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नई दिल्ली को गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का प्रस्ताव भेजा है। शुक्रवार को मिले इस प्रस्ताव का भारत ने अभी कोई जवाब नहीं दिया है, हालांकि इस पर विचार किया जा रहा है। हिंदुस्तान टाइम्स


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    By Azad Hind Desk जनवरी 20, 2026
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    नई दिल्ली: टैरिफ को लेकर भारत-अमेरिका के रिश्तों में तल्खी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नई दिल्ली को गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का प्रस्ताव भेजा है। शुक्रवार को मिले इस प्रस्ताव का भारत ने अभी कोई जवाब नहीं दिया है, हालांकि इस पर विचार किया जा रहा है।

    हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अधिकारियों ने रविवार को स्वीकार किया कि नई दिल्ली को इस पहल में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। अधिकारी इस मामले पर जांच कर रहे हैं क्योंकि इसमें कई संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं। विस्तार से बताए बिना एक अधिकारी ने कहा कि भारत का रुख दो राज्य समाधान के समर्थन में हैं और वह इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से की गई सभी पहलों का समर्थन करता है।

    ट्रंप ने मोदी को लिखा लेटर

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लेटर में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को मध्य पूर्व में ‘शांति बहाल करने के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व शानदार प्रयास’ में शामिल होने और साथ ही ‘वैश्विक संघर्ष के समाधान के लिए एक साहसिक नए दृष्टिकोण’ पर काम करने के लिए आमंत्रित करना उनके लिए बहुत सम्मान की बात है। ट्रंप द्वारा यह लेटर पाकिस्तान, तुर्की समेत 60 देशों को भेजा गया है।

    भारतीय पक्ष को इस पीस प्लान में कई आपत्तियां

    हिंदुस्तान टाइम्स के सूत्रों के अनुसार, ट्रंप द्वारा प्रस्तावित इस बोर्ड ऑफ पीस प्लान में भूमिका निभाने की योजनाओं को लेकर भारतीय पक्ष को कई आपत्तियां हैं और नई दिल्ली को संदेह है कि भविष्य में इसे कश्मीर के मुद्दे को भी शामिल करने के लिए विस्तारित किया जा सकता है। इस बारे में सूत्र ने ट्रंप के उन बार-बार किए गए दावों की ओर इशारा किया, जिसमें उन्होंने मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुई झड़प को रुकवाने की बात कही थी। जबकि नई दिल्ली की ओर से ट्रंप के इन सभी दावों को खारिज कर दिया गया था।

    • भारतीय पक्ष को चार्टर के कई क्लॉज पर आपत्तियां
    • कश्मीर मुद्दे को शामिल करने को लेकर संदेह
    • भारत-पाकिस्तान को लेकर ट्रंप के बयान

    फ्रांस भी कानूनी ढांचे की कर रहा जांच

    इस बीच, फ्रांसीसी प्रेसीडेंसी की सोच से परिचित लोगों ने सोमवार को कहा कि ‘पेरिस फिलहाल शांति बोर्ड में शामिल होने के निमंत्रण पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देने का इरादा नहीं रखता है। फ्रांस वर्तमान में अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इस बोर्ड के लिए प्रस्तावित कानूनी ढांचे की जांच कर रहा है। क्योंकि यह बोर्ड केवल गाजा तक सीमित नहीं है।

    उन्होंने आगे कहा कि ‘फ्रांस गाजा में युद्धविराम और ‘फिलिस्तीनियों और इजरायलियों के लिए एक विश्वसनीय राजनीतिक भविष्य’ के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, साथ ही प्रभावी बहुपक्षवाद का समर्थन करना जारी रखेगा।’

    रूस ने भी इस बोर्ड ऑफ पीस पर कर रहा विचार

    क्रेमलिन ने दावा किया है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए न्योता भेजा है। मास्को इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है और इस बारे में वॉशिंगटन से बातचीत की उम्मीद करता है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पत्रकारों को इसकी जानकारी दी।

    रूसी न्यूज एजेंसी ‘तास’ के अनुसार एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति पुतिन को कूटनीतिक माध्यमों से इस बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का ऑफर मिला है। हम अभी इस प्रस्ताव का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “हम सभी विषयों पर स्पष्टता के लिए अमेरिकी पक्ष से संपर्क करने की उम्मीद करते हैं।”

    क्या है बोर्ड ऑफ पीस

    बोर्ड ऑफ पीस, गाजा के लिए एक ‘अम्ब्रेला ओवरसाइट बॉडी’ के तौर पर काम करेगा और जिसकी अध्यक्षता ट्रंप करेंगे, उसमें विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होंगे। मिडिल ईस्ट और दुनिया भर के कई देशों के नेताओं को इसके लिए न्योता भेजा गया है।

    रॉयटर्स ने एक लेटर और ड्राफ्ट चार्टर की एक कॉपी के हवाले से कहा है कि बोर्ड की अध्यक्षता ट्रंप जीवन भर करेंगे। यह गाजा संघर्ष को सुलझाने से शुरू होगा और फिर दूसरे संघर्षों से निपटने के लिए इसका विस्तार किया जाएगा। लेटर में कहा गया है कि सदस्य देशों का कार्यकाल तीन साल तक सीमित होगा और स्थायी सदस्यता हासिल करने के लिए कथित तौर पर 1 बिलियन डॉलर का भुगतान करना होगा।

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