आरोपों से यह स्पष्ट होना चाहिए कि अपशब्दों में जातिगत नाम का प्रयोग किया गया था, या जातिगत नाम का प्रयोग अपशब्द के रूप में किया गया था। उपरोक्त से यह स्पष्ट होता है कि धारा 3(1)(s) में भी अपमान का तत्व मौजूद है।
जाति के प्रति अपमानजनक शब्द अपराध माना जाएगा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि यह जाति के प्रति जानबूझकर अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया जाता है तो यह अपराध माना जाएगा। धारा 3(1)(s) के अंतर्गत विषयवस्तु अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति पर किए गए अपशब्द हैं। हालांकि, जिस इरादे से अपशब्द कहे गए थे, वह जाति के प्रति अपमानजनक होना चाहिए, जिसके परिणामस्वरूप जाति आधारित अपमान की भावना उत्पन्न होती है।
पीठ ने अधिनियम की धारा 3(1)(आर) पर सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसले का हवाला दिया, जिसमें सार्वजनिक स्थान पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य का जानबूझकर अपमान करने या उसे अपमानित करने के इरादे से डराने-धमकाने की बात कही गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने 4 मूलभूत तत्व बताए
पीठ ने कहा कि इस धारा के तहत अपराध गठित करने के लिए चार मूलभूत तत्व हैं, जो इस प्रकार हैं: (क) आरोपी व्यक्ति अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं होना चाहिए; (ख) आरोपी को जानबूझकर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य का अपमान करना या उसे डराना-धमकाना चाहिए; (ग) आरोपी को ऐसा उस व्यक्ति को अपमानित करने के इरादे से करना चाहिए; और (घ) आरोपी को ऐसा सार्वजनिक स्थान पर करना चाहिए।














