विश्लेषकों का कहना है कि अगर नेतन्याहू ट्रंप के ऑफर को खारिज कर देते तो अमेरिकी राष्ट्रपति की इससे शर्मिंदगी होती। ट्रंप दावोस में इस बोर्ड को लेकर बड़ा ऐलान करने वाले हैं। इजरायल को यह भी डर था कि अगर वह गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल नहीं होता तो उसका इस ग्रुप पर प्रभाव खत्म हो जाता। अब इसे स्वीकार करने के बाद इजरायल तुर्की, कतर और रूस तथा अन्य देशों के साथ गाजा के भविष्य को लेकर होने वाली इस परिषद की बैठकों में शामिल होगा। इजरायल के पास भी समान वोटिंग का अधिकार होगा। यह परिषद ही गाजा के भविष्य और इजरायल की सुरक्षा का फैसला लेगी।
फ्रांस को ट्रंप ने दी थी 200 फीसदी टैरिफ की धमकी
इससे पहले ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति को गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शाामिल नहीं होने पर फ्रांसीसी शराब पर 200 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने वाले देश को 1 अरब डॉलर फंड देना होगा। इस बोर्ड के चेयरमैन खुद डोनाल्ड ट्रंप होंगे। इस बीच ट्रंप ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र ने ‘कभी भी अपनी क्षमता के अनुसार काम नहीं किया’ और यदि उसने प्रभावी भूमिका निभायी होती तो गाजा के लिए गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की जरूरत ही ना पड़ती। ट्रंप ने संकेत दिए कि नवगठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ संयुक्त राष्ट्र का स्थान ले सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का गठन किया है जिसका उद्देश्य गाजा के पुनर्निर्माण में सहायता करना है। ट्रंप से जब एक संवाददाता सम्मेलन में सवाल किया गया कि क्या वह चाहते हैं कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ संयुक्त राष्ट्र का स्थान ले तो ट्रंप ने कहा, ‘यह हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र बहुत मददगार साबित नहीं हुआ है। मैं संयुक्त राष्ट्र की क्षमताओं का बड़ा समर्थक हूं, लेकिन यह कभी अपनी पूरी क्षमता के अनुसार काम नहीं कर पाया।’ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल की पहली वर्षगांठ पर मंगलवार को व्हाइट हाउस के एक प्रेसवार्ता में पत्रकारों से रूबरू हुए और उनके प्रश्नों के उत्तर दिए।
संयुक्त राष्ट्र की जरूरत नहीं होगी: ट्रंप
ट्रंप ने कहा, ‘अमेरिका ने हाल ही में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का गठन किया है और मुझे लगता है कि यह वाकई शानदार साबित होने जा रहा है। अगर संयुक्त राष्ट्र ने अधिक कदम उठाए होते तो शायद इसकी जरूरत नहीं होती।’ ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले साल में आठ युद्धों को सुलझाया, लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने किसी भी युद्ध में उनकी मदद नहीं की। ट्रंप ने कहा, ‘मैं उन्हें दोष नहीं दे रहा हूं। मैंने उन्हें मदद के लिए फोन नहीं किया, लेकिन मैंने राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों को एक साथ बैठाया, हमने सख्ती से बात की, आपसी सहमति बनाई और वे मुझे पसंद करने लगे।’














