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  • सुखना झील को कितना सुखाओगे? सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ की झील को लेकर क्यों जताई ये चिंता

    नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ की मशहूर सुखना झील के सूखने पर चिंता जताई है। हरियाणा सरकार को पिछली गलतियों को न दोहराने की चेतावनी देते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अधिकारियों और बिल्डर माफिया की मिलीभगत के कारण सुखना झील पूरी तरह से खराब हो चुकी है।


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    By Azad Hind Desk जनवरी 21, 2026
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    नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ की मशहूर सुखना झील के सूखने पर चिंता जताई है। हरियाणा सरकार को पिछली गलतियों को न दोहराने की चेतावनी देते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अधिकारियों और बिल्डर माफिया की मिलीभगत के कारण सुखना झील पूरी तरह से खराब हो चुकी है। बेंच में CJI सूर्यकांत के अलावा जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी अरावली पहाड़ियों के मामले पर सुनवाई करते हुए की।

    सुखना झील का लगातार गिर रहा जलस्तर

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य के अधिकारियों और राजनेताओं की मिलीभगत से बिल्डर माफिया काम कर रहा है। आप सुखना झील को कितना सुखाओगे? आपने झील को तो पूरी तरह से खराब कर दिया है। दरअसल, बारिश के पानी पर निर्भर सुखना झील कभी चंडीगढ़ का प्रमुख पर्यटन केंद्र हुआ करती थी, लेकिन बीते वर्षों में लगातार गिरते जलस्तर ने इसकी सुंदरता और अस्तित्व दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    अरावली पर विशेषज्ञ समिति का गठन का निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि अवैध खनन से अपूरणीय क्षति हो सकती है, इसलिए वह अरावली में खनन और संबंधित मुद्दों की व्यापक एवं समग्र जांच के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों की एक समिति गठित करेगा। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और न्यायमित्र के. परमेश्वर को चार सप्ताह के भीतर खनन क्षेत्र के विशेषज्ञ पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों के नाम सुझाने का निर्देश दिया, ताकि विभिन्न पहलुओं की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जा सके।

    बेंच ने कहा कि समिति इस न्यायालय के निर्देशन और निगरानी में कार्य करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने उस आदेश को भी विस्तारित किया, जिसमें अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की एक समान परिभाषा को स्वीकार करने वाले 20 नवंबर के निर्देशों को स्थगित रखा गया था। सुनवाई के दौरान न्यायालय को सूचित किया गया कि छिटपुट स्थानों पर अवैध खनन हो रहा है, और पीठ ने राजस्थान सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज के इस आश्वासन को रिकॉर्ड में लिया कि इस तरह का कोई भी अनधिकृत खनन नहीं होगा।

    अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को लेकर उठे विवाद

    अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को लेकर उठे विवाद के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने ‘अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की परिभाषा तथा उससे जुड़े मुद्दे’ शीर्षक से इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया था। अरावली की नई परिभाषा को लेकर जारी बवाल के बीच, न्यायालय ने पिछले साल 29 दिसंबर को अपने 20 नवंबर के उन निर्देशों को स्थगित कर दिया था, जिनमें इन पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की एक समान परिभाषा को स्वीकार किया गया था।

    एक समान परिभाषा स्वीकार की गई थी

    इन निर्देशों में अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की एक समान परिभाषा स्वीकार की गई थी। न्यायालय ने कहा था कि कुछ गंभीर अस्पष्टताओं का समाधान जरूरी है, जिनमें यह आशंका भी शामिल है कि 100 मीटर ऊंचाई और पहाड़ियों के बीच 500 मीटर की दूरी के मानक से अरावली का बड़ा हिस्सा पर्यावरण संरक्षण से बाहर हो सकता है। अदालत ने 20 नवंबर को अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की एक समान परिभाषा को स्वीकार कर लिया था और विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने तक दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में फैले इसके क्षेत्रों के भीतर नए खनन पट्टे देने पर प्रतिबंध लगा दिया था।

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